साहित्य / मीडिया

मैं एक मरती हुई भाषा बोलती हूं (थी!)। मार दी गई भाषा! तुमने कहा था कि तुम कोई भाषा जानते हो जो हमें हमारे गंवारूपन और उज्जड़ता से उबार ले जाएगी। और हम तो तमाम दूरियां लांघ आए जहां तक हमें विकास की दौड़ में पीछे धकेलती हमारी भाषा सुनी या बोली जा सकती थी।

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मुट्ठीभर आसमान और सीमाबद्ध धरती का अक्स समेटे भारतीय स्त्री ने आंगन की भीतियों को लाल गेरू से पोतकर उसपर बड़ा-सा ’स’ लिख दिया।

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  आर्मी कोर्ट रूम में आज एक केस अनोखा अड़ा था! छाती तान अफसरों के आगे फौजी बलवान खड़ा था!! बिन हुक्म बलवान तूने ये कदम कैसे उठा लिया? किससे पूछ उस रात तू दुश्मन की सीमा में जा लिया??

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एक युवा संन्यासी था। उस पर एक राजकुमारी मोहित हो गई। राजा को पता चला तो उसने संन्यासी से राजकुमारी के साथविवाह करने को कहा। संन्यासी बोला, 'मैं तो हूं ही नहीं।  

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बगदाद में मारुक नाम के एक साधु पुरुष रहते थे। एक बार एक भाई उनके साथ उनकी झोंपड़ी में मेहमान के नाते ठहरे, नमाज का वक्त होने पर वे भाई उठे और एक कोने में जाकर नमाज पढ़ने लगे।  

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मनुष्य का जीवन नश्वर है। सम्भवत: देव-दानवों का जीवन भी नश्वर रहा होगा, इसीलिए उन लोगों ने सागर का मंथन करके अमृत प्राप्त कर अमर हो जाने का संकल्प किया।    

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