धर्म, कला और संस्कृति

  मथुरा : मौसम परिवर्तन की प्रतीक होली के दिन सभी बंधन टूट जाते हैं, कोई भी बाध्यता नहीं रहती इस दिन सभी रंगों में सराबोर हो जाते हैं। रंगो में पुते विचित्र और हास्यास्पद चेहरे लिए लोगों की टोली सड़कों पर नजर आती है। इसे मूर्ख दिवस की संज्ञा दी गई है, हर स्तर की बेवकूफी इस दिन क्षम्य होती हैं।

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नंदगांव के हुरिहारे बरसाना की गोपिकाओं के साथ होली खेलने के लिए सजने लगे हैं। अपनी ढालों को सजाने लगे हैं। गोपिकाओं की लाठियों के प्रहार को सहने के लिए चिलम पीते हैं, भांग पीते हैं और हुक्के गुड़गुड़ाते हैं। ढोल-मंजीरों की ताल पर होली रसिया गाते बरसाना पहुंचते हैं।

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