दुनिया

भारत आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां यह सिर्फ सीमाओं की रक्षा नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता, संस्कृति और भविष्य की लड़ाई लड़ रहा है। यह संघर्ष केवल आतंकवाद के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मध्ययुगीन मानसिकता के विरुद्ध है, जो मानवता को गुलाम बनाना चाहती है। यह जंग है—आधुनिकता बनाम बर्बरता, प्रगति बनाम पिछड़ापन, एकता बनाम टुकड़ों में बंटी सोच...

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डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ज़लज़ला ला दिया है। अर्थशास्त्री ‘ग्लोबल साउथ’ पर इसके विनाशकारी प्रभावों की चेतावनी दे रहे हैं। भारत जैसे देश, जो अभी-अभी आर्थिक विकास की राह पर चले ही थे कि अब वे इस तूफ़ान की चपेट में आ रहे हैं। क्या धमकियों और लेन-देन पर आधारित विदेश नीति से अमन कायम हो सकता है? यह सवाल दुनियाभर के नेताओं के ज़ेहन में अब गूंज रहा है।

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एक के बाद एक ढेर सारे फरमानों और पहलों के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पृथ्वी को हिलाकर रख दिया है। अभी प्रतिक्रियाएं दबी हुई हैं, स्तब्ध हैं। राजनैतिक टिप्पणीकार, खुद अमेरिका के बुद्धिजीवी और स्वतंत्र पत्रकार आंकलन करने से बच रहे हैं। व्हाइट हाउस का नया किरायेदार कभी भी, किसी को भी कुछ भी कहकर चौंका सकता है। विश्व की कई राजधानियों में इसके चलते तनाव है। खरीद-फरोख्त का बाजार गरम है और दुश्मनों को भी प्रलोभन देकर भ्रमित किया जा सकता है। लाठी और भैंस का रिश्ता एक बार फिर से चर्चा में है...

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गैर कानूनी अप्रवासियों के खिलाफ जो जंग छेड़ी है, उसके परिणामस्वरूप भारत समेत एक दर्जन देशों में खलबली मची हुई है। कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज करने के पश्चात सदियों से यह मुल्क रंग-बिरंगे लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा है। लेकिन, अब ऐसा लगने लगा है कि प्रवासियों के लिए अमेरिका जाना आसान नहीं होगा।

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क्या अमेरिकी लोकतंत्र के नए, उतावले बादशाह, शांति दूत डोनाल्ड ट्रंप विश्व में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए नायक की भूमिका में सफल होंगे, या उनका बड़बोलापन युद्ध और संघर्षों की नई इबारत लिखेगा? क्या अमेरिकन पूंजीवादी व्यवस्था एक नई ‘राष्ट्रीय समाजवादी मूल्य आधारित’ विचारधारा को अपनाने के लिए तैयार है।

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वर्ष 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात, पाकिस्तान का पूर्वी भूभाग वर्ष 1971 में पृथक होकर स्वतंत्र देश के रूप में बांग्लादेश के नाम से स्थापित हुआ और विगत वर्ष 2024 में वही बांग्लादेश एक बार फिर पाकिस्तान की गोद में समाता हुआ दिख रहा है...

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