संपादकीय

एक सच्‍चे गांधीवादी नेल्‍सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति की सरकार से मानवाधिकार, स्‍वतंत्रता और अश्‍वेतों की भागीदारी हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके अपनाए। नेता के रूप में नेल्‍सन मंडेला की महात्‍मा गांधी, इटली के गरिबाल्‍डी और सोवियत संघ के लेनिन जैसे प्रखर सुधारवादियों से तुलना की जा सकती है।

Read More

भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से घाटे में चल रही है। रेलवे को बचाने का एकमात्र तरीका है जब यात्री रेल में मिलने वाली सुविधाओं के लिए भाड़ा दें। अब तक मालभाड़े से हो रही आमदनी से यात्री सेवाओं को चलाया जा रहा था। लेकिन, हाल के वर्षों में मालभाड़े पर भी असर पड़ने लगा था।

Read More

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद हुई बहस का जवाब देते हुए दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण कई मायनों में अहम था। इस भाषण को सुनने के बाद ऐसा लगा कि देश की राजनीति में शायद 'अच्छे दिन' आने वाले है।

Read More

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना फिर से सामने आई है और यह घटना अति सभ्य होने का दंभ भरने वाले हमारे भारत देश की है। कहने को तो यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं से ऐसा लगता है कि इस देश में न तो नारी का मान-सम्मान है ही नहीं, अगर कुछ है तो सिर्फ और सिर्फ अपमान।

Read More

ठीक 188 साल पहले पं. जुगल किशोर शुक्ल ने वर्ष 1826 में जब पहला हिन्दी अखबार ‘उदन्त मार्तण्ड’ निकाला तो हिंदी पत्रकारिता का मतलब सिर्फ ‘अखबार’ ही रहा होगा... ऐसा शायद किसी ने न सोचा होगा कि आने वाले युग में अखबार के अलावा दूसरे कई माध्यम संवाद संप्रेषण करने के लिए अपनी जगह बनाएंगे।

Read More

आपके घर में अगर मेहमान आ गए तो अपके अंदर का 'वर्तमान विचारक' अपने आपको व्यवहार करते हुए देख पाएगा। 'देखा! मेहमान के सामने मैं कैसे व्यवहार कर रहा हूं।' वह वर्तमान विचारक हैं, वह सिर्फ मेहमान को ही नहीं देख रहा है बल्कि मेहमान को देखकर अपने अंदर क्या हो रहा है, वह भी देख रहा है। वह कहां सिकुड़ रहा है और कहां खुल रहा है, ये सभी बातें भी वह देख सकता है।

Read More



Mediabharti