संपादकीय

आप जैसा विचार रखते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। क्या यह सच्चाई नहीं है? आपकी सोच आपकी नियति को तय करती है, यह आपकी सोच का ही नतीजा होती है। आप अपनी सोच से ज्यादा विकास नहीं कर सकते और न ही आप उससे ज्यादा कुछ हासिल कर सकते हैं। केवल लाटरी का मामला अपवाद हो सकता है। लोग अपने आस-पास की चीजों के मुताबिक ही चीजों को खोजने में विश्वास रखते हैं।

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आत्मविश्वास बढ़ाने का सबसे अच्छा उपाय है या तो आप प्रेरणावाचक भाषण पढ़ें या चुनें। यदि आपके पास इसके लिए समय नहीं है तो आप अपना प्रेरणावाचक टेप बना सकते हैं जो आपके अच्छे तरीकों और अच्छे विचारों पर आधारित हो।

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जैसे ही आप एक नया कार्य प्रारम्भ करते हैं तो इसका आत्मविश्लेषण करना अच्छी बात होगी कि आपकी सोच के अनुसार क्या चलता है? क्या आप जो प्राप्त करना चाहते हैं, उस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और क्या आप इसको अपने दिल से कर रहे हैं? आप अपने दिन-प्रतिदिन के काम करने के दौरान अपने लम्बे उद्देश्य, कर्तव्य और लक्ष्य को नजरअंदाज न करें।

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सफलता का यह एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं कि समय बड़ा कीमती होता है और इसकी कद्र करनी चाहिए। लेकिन, वास्तव में हम ऐसा कर नहीं पाते। बहुत-सी चीजों को हम जानते हुए, उनका मूल्य समझते हुए भी उसकी कद्र नहीं कर पाते हैं। कई बार हम किसी आइडिया पर सोचते तो कई दिनों तक हैं, पर उसे अमल में नहीं लाते।

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हर चीज जो हम करना चाहते हैं इसके लिए पर्याप्त समय नहीं होता, मगर जो चीजें हमारे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और जो हमारे जीवन में बदलाव ला सकती हैं ऐसी चीजों के लिए हमेशा पर्याप्त समय होता है, बशर्ते हम समय का नियोजन कुशलतापूर्वक करें, ताकि किसी कारणवश किसी काम में ज्यादा समय भी लग जाए तो ये आपके लिए परेशानी का सबब न बने।

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जीवन में हम किसी भी तरह की स्थिति में रहें, हमें विश्वास करने में पीछे नहीं रहना चाहिए। विजेता हमेशा अपनी जीत के प्रति आशान्वित रहते हैं। इसका उल्टा भी सच है कि आशावान एवं मुस्कुराने वाले ही साधारणतया विजेता होते हैं। इसलिए हमेशा चेहरा हंसमुख रखें।

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