होली के सात दिन बाद होती है कुत्ते की पूजा...!

होली के सात दिन बाद बसौड़ा त्योहार मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और कई स्थानों पर कुत्ते को खाना खिलाकर, उसको पूजा जाता है।

जिस दिन सुबह को माता की पूजा की जानी होती है, उससे एक दिन पहले शाम को खाना बना लिया जाता है। खाने में पूड़ी, हलवा, कचौड़ी, अरबी, आलू व करेला आदि की सब्जी, पापड़, चिप्स तथा होली के मौके पर बनाई जाने वाली उड़द की दाल की चंदिया आदि व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा, बूंदी का रायता, मीठे चावल इत्यादि भी बनाए जाने का चलन है।

माता को पूजने के बाद सुबह को बासी भोजन ही खाया जाता है। सुबह उठकर थाली में पूजा का सब सामान लगाया जाता है। सात दीपक में हल्दी लगाकर रख लेते हैं। एक दीपक में एक बूंदी का लड्डू, दूसरे में पेड़ा, तीसरे में दही, चौथे में हल्दी, पांचवें में चावल, छठे में काले-पीले बिनौले और अंतिम दीपक को जलाकर, एक बरतन में पानी तथा होली के दिन बचाकर रखी गई गूलरी की एक माला लेते हैं। सारा सामान हाथ में लेकर सारे बच्चों और बड़ों को घेरे में बिठाकर सात बार सबके ऊपर से घुमाते हैं। माता के भजन गाते जाते हैं। जो सामान घर में बनाया गया है उसमें से कुछ निकालकर दान कर दिया जाता है। 

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