दुनिया का सबसे पुराना बांध है 'ग्रैंड एनीकट'...!


क्या आपको पता है कि विश्व का सबसे प्राचीन बांध भारत में है…! … और तो और… इसकी इंजीनियरिंग विश्व में सबसे पुरानी अभियांत्रिकीयों में से एक है। प्रारंभिक चमत्कार कहलाने वाला दुनिया का सबसे प्राचीन बांध और सिंचाई प्रणालियों में से एक 'ग्रैंड एनीकट' की कहानी बहुत रोचक है।

'ग्रैंड एनीकट' बांध का निर्माण तकरीबन दो हजार साल पहले तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली जिला स्थित कावेरी नदी पर किया गया था। इसे 'कल्लनई बांध' के नाम से भी जाना जाता है। यह बांध आज न केवल सही सलामत है बल्कि सिंचाई का एक बहुत बड़ा साधन भी है। यह दुनिया में सबसे पुराने बांधों में से एक है।

इस बांध का निर्माण संगम काल के चोल वंश के राजा करिकल चोल ने करवाया था ताकि कावेरी नदी की धारा के प्रभाव को मोड़ा जा सके। दरअसल, कावेरी नदी की जलधारा का प्रवाह बहुत तीव्र है और बरसात के मौसम में डेल्टा क्षेत्रों में यह अकसर बाढ़ का कारण भी बनती थी। इस वजह से इस नदी पर बांध का निर्माण कराया गया ताकि इसके पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल में लिया जा सके।

चोल वंश के राजा करिकल 190 ई. के आसपास सत्ता में आए। करिकल के शासनकाल को व्यापार, युद्ध और निर्माण कार्यों के लिए जाना गया। उन्होंने रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार का विस्तार कर अपने राज्यों के खजाने भरे। फिर, उन्होंने व्यापार के माध्यम से प्राप्त धन का उपयोग युद्धों और निर्माण परियोजनाओं में किया। चोल वंश द्वारा नियंत्रित क्षेत्र का विस्तार सीलोन तक हुआ, लेकिन इस क्षेत्र में उनका सबसे अधिक योगदान ‘ग्रैंड एनीकट’ है। आज भी इस बांध के एक छोर पर करिकल चोल की एक मूर्ति स्थापित है।

कल्लनई बांध समय की कसौटी पर खरा उतरा है। अपने मूल निर्माण के 1800 से अधिक वर्षों के बाद भी यह बांध अपने इच्छित उद्देश्य को पूरा कर रहा है। 1800 के दशक में सबसे बड़ा बदलाव तब हुआ जब अंग्रेजों ने फैसला किया कि बांध को आधुनिकीकरण की जरूरत है।

बताया जाता है कि इस बांध का मूल डिजाइन लगभग 16 शताब्दियों तक चला। इसके बाद, प्रसिद्ध ब्रिटिश सिंचाई विशेषज्ञ सर आर्थर कॉटन ने कल्लनई बांध के लिए अपना स्वयं का बांध डिजाइन तैयार किया। यही कारण है कि यह बांध बहुत पुराना होने के बावजूद आज भी मजबूती के साथ टिका हुआ है।

तमिलनाडु में आज भी इस बांध को सिंचाई कार्यों के लिए उपयोग में लिया जा रहा है। इस बांध को अपनी निर्माण शैली के कारण आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग के बेहतरीन कौशल के रूप में देखा जाता है। पूरी दुनिया के लिए इसे एक प्रेरणास्रोत माना जाता है और हर साल अनगिनत संख्या में टूरिस्ट इस बांध को देखने आते हैं। पानी की तेज धार के कारण इस नदी पर किसी निर्माण या बांध का टिक पाना बहुत ही मुश्किल काम था। उस समय के कारीगरों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और और नदी की तेज धारा पर बांध बना दिया जो दो हजार वर्ष बीत जाने के बाद आज भी ज्यों का त्यों खड़ा है।



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