आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को लेकर बाजार में माहौल अचानक बदल गया। मानो रातों-रात सब कुछ उलट गया हो। चंडीगढ़ शाखा में ₹590 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ, जो हरियाणा सरकार से जुड़े खातों से संबंधित था। खबर ने बाजार को हिला दिया। हालांकि, सरकार की प्रतिक्रिया तेज और सख्त रही और बैंक को ‘डी-एम्पैनल’ कर दिया गया। राज्य के कारोबार को संभालने की भूमिका छीन ली गई।
फिलहाल, बैंक ने हरियाणा सरकार को ब्याज सहित पूरी रकम चुका दी है और इस पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। लेकिन, कड़वी सच्चाई यह है कि बैंक की बैलेंस शीट को इसका खामियाजा, अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों रूप से भुगतना पड़ेगा।
Read in English: IDFC First Bank battles a crisis of reputation
ट्रेडिंग फ्लोर पर घबराहट तुरंत दिखी। सोमवार, 23 फरवरी, को शेयर 20 प्रतिशत लोअर सर्किट पर जा अटका और ₹66–70 के स्तर पर जम गया। निवेशकों के मानो पैरों तले ज़मीन खिसक गई हो। स्क्रीन लाल हो गईं, पोर्टफोलियो सिकुड़ गए, और यह सवाल हवा में तैरने लगा कि “क्या यह सिर्फ एक ठोकर है या एक बड़ा गहरा संकट?” शेयरों में यह गिरावट फिलहाल ठहरी हुई प्रतीत हो रही है।
बैंक के अंदर माहौल रक्षात्मक और स्थिर था। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि संस्थान लाभप्रदता के साथ “ट्रैक पर” है। उन्होंने समझाया कि घोटाला गंभीर है लेकिन घातक नहीं है। यह नेटवर्थ का केवल 0.9 प्रतिशत और प्री-टैक्स मुनाफे का महज 20 प्रतिशत है। आंकड़े भरोसा दिलाने के लिए थे, लेकिन हिल चुके विश्वास को आंकड़े शायद ही शांत कर पाते हैं।
ब्रोकरेज हाउस भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों ने लक्ष्य ₹105 से घटाकर ₹92 कर दिया है। यह डाउनग्रेड जरूर है, लेकिन मौत का फरमान नहीं लगता। इस स्तर पर भी शेयर काफी आकर्षक लगता है। संकेत साफ है। अगर भरोसा लौटाया जा सके तो रिकवरी संभव है।
ट्रेडर्स के लिए दुविधा तीखी दिखी। शॉर्ट-टर्म खिलाड़ी अस्थिरता और जोखिम देख रहे हैं। ठीक एक तूफ़ान की तरह, जो अभी थमा नहीं है। लॉन्ग-टर्म निवेशक एक अलग तस्वीर देख रहे हैं। उनका कहना है कि एक बैंक जिसकी बुनियाद मजबूत है, वह अब भारी छूट पर ट्रेड कर रहा है। अब चुनाव डर और विश्वास के बीच है। कई निवेशक इस घटना की तुलना इंडसइंड बैंक से कर रहे हैं।
इंडसइंड बैंक के मामले में अनियमितता उजागर होने के बाद शेयर इसी तरह नीचे आया था। एक समय तो यह अपने शीर्ष मूल्यांकन का करीब आधा तक हो गया था, और निचले स्तरों पर स्थिर होकर इसने निवेशकों को नए अवसर दिए। फिलहाल, इंडसइंड बैंक ऊपर की ओर चढ़ने के क्रम में है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के मामले में कहानी अब बैलेंस शीट से हटकर ‘धारणा’ पर आ गई है। घोटाला, सरकारी कार्रवाई, और बाजार की भावना, सब एक ही दिन में आपस में टकरा गए। किसी ने अवसर देखा तो किसी ने खतरा। लेकिन, अनिश्चितता सबने देखी।
आगे का रास्ता अभी साफ नहीं है। जांचें होंगी, गवर्नेंस की परीक्षा होगी, और भरोसा फिर से कमाना होगा। फिलहाल, शेयरधारक चौराहे पर खड़े हैं—घबराहट और धैर्य के बीच, नुकसान और संभावित रिकवरी के बीच...।
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* इस लेख के कुछ अंश विभिन्न एजेंसी और वित्तीय रिपोर्ट से लिए गए हैं।






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