साल 1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘इम्तहान’ का गीत ‘इस तरह आशिकी का...’ की खासियत केवल इसका रोमांटिक अंदाज नहीं है, बल्कि इसके दो अलग-अलग संस्करण भी हैं। एक संस्करण अमित कुमार ने गाया, जबकि दूसरे को कुमार सानू ने अपनी आवाज दी। दोनों संस्करणों का इस्तेमाल फिल्म में अलग-अलग किरदारों पर किया गया।
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हैरी बावेजा के निर्देशन में बनी ‘इम्तहान’ में सनी देओल, सैफ अली खान और रवीना टंडन ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म की कहानी में रवीना टंडन का किरदार प्रीति, सनी देओल के किरदार राज का अतीत है, जबकि सैफ अली खान का किरदार विक्की उसके वर्तमान जीवन से जुड़ा है। राज उसका पूर्व पति है और विक्की उसके वर्तमान प्रेम-संबंध का प्रतिनिधित्व करता है। इस पृष्ठभूमि में एक ही गीत को दोनों पुरुष किरदारों पर फिल्माने का निर्णय खास अर्थ रखता है। गीत के शब्द समान प्रेम-भावना व्यक्त करते हैं, लेकिन उन्हें गाने वाले कलाकार और पर्दे पर दिखाई देने वाले किरदार बदल जाने से उनका संदर्भ भी बदल जाता है। इस गीत का संगीत अनु मलिक ने तैयार किया था और इसके बोल फैज अनवर ने लिखे थे।
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अमित कुमार की आवाज में गाया गया संस्करण सनी देओल पर फिल्माया गया है। कहानी के संदर्भ में यह प्रस्तुति राज के किरदार से जुड़ती है, जिसका प्रीति के साथ रिश्ता अतीत का हिस्सा बन चुका है। गीत के बोलों में प्रेम को अमिट बनाने की इच्छा ऐसे किरदार के लिए एक अलग भाव पैदा करती है, जो नायिका के जीवन में पहले महत्वपूर्ण स्थान रखता था। अमित कुमार की गायकी में सहजता और खुलापन है, जो गीत की भावनाओं को सीधे श्रोता तक पहुंचाता है।
दूसरा संस्करण कुमार सानू ने गाया और इसे सैफ अली खान पर फिल्माया गया। विक्की का किरदार प्रीति के वर्तमान जीवन से जुड़ा है, इसलिए इसी गीत की प्रस्तुति यहां अलग संदर्भ ग्रहण करती है। कुमार सानू की आवाज में सुरों को खींचने, शब्दों को भावनात्मक विस्तार देने और मुखड़े को यादगार बनाने का विशिष्ट अंदाज सुनाई देता है।
अमित कुमार और कुमार सानू की गायकी की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं, लेकिन फिल्मांकन उन्हें कहानी के दो अलग पड़ावों से जोड़ता है। दर्शक को एक ही रचना सुनाई देती है, लेकिन उसके सामने मौजूद व्यक्ति और कहानी में उसकी जगह बदल जाती है।
हिंदी फिल्मों में किसी गीत के एक से अधिक संस्करण होना अपने आप में असामान्य नहीं है। कभी धुन में बदलाव करके अलग भाव पैदा किया जाता है, कभी पुरुष और महिला गायकों की आवाजों में एक ही रचना प्रस्तुत होती है, तो कभी कहानी की जरूरत के अनुसार गीत दोहराया जाता है। लेकिन, ‘इम्तहान’ में इस गीत के दो संस्करणों की खासियत यह है कि इसमें अतीत और वर्तमान के बीच का अंतर गीत के माध्यम से सामने आता है। दोनों प्रस्तुतियों में रवीना टंडन की मौजूदगी इस संबंध को और महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि उनके किरदार के जीवन में दोनों पुरुषों की भूमिकाएं अलग हैं।
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इस तरह, ‘इस तरह आशिकी का...’ के रूप में यह कहानी-आधारित प्रयोग नब्बे के दशक के हिंदी फिल्म संगीत की एक दिलचस्प मिसाल बनाता है।

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