क्या रही होगी 'किस किसको प्यार करूं2' के पीछे की मजबूरी...!


कभी 'खिलाड़ी', 'बाजीगर', 'सोल्जर', 'अजनबी' और 'हमराज' जैसी 'कल्ट' फिल्में देने वाले वाले अब्बास-मस्तान को 'किस किसको प्यार करूं' जैसी फिल्में बनाते देखने से दिल को बहुत दर्द होता है। इतना ही नहीं, दोबारा 'किस किसको प्यार करूं2' जैसी फिल्म बनाने की क्या मजबूरी रही होगी, यह भी समझ से बाहर है।

याद करिए, ‘खिलाड़ी’ ने अक्षय कुमार को अगली पंक्ति में लाकर बिठा दिया था। ‘बाजीगर’ से शाहरुख खान ने अपने पैर बॉलीवुड में ऐसे जमाए कि आज तक कोई उन्हें उखाड़ने की सोच तक नहीं सका है। ‘सोल्जर’ आज भी बॉबी देओल के स्टारडम को सबसे बेहतरीन तरीके से परिभाषित करती है। और, यदि अक्षय खन्ना की फिल्मों की सूची को गौर से देखें तो उस दौर में ‘हमराज’ उनकी आभा को सबसे अच्छे तरीके से दर्शकों के सामने रखती है। लेकिन, कपिल शर्मा के साथ ‘किस किसको प्यार करूं’ वे कितनी भी बार बना लें। रहेंगे वही ढाक के तीन पात...।     

Read in English: ‘Kis Kisko Pyaar Karoon 2’, Abbas-Mustan’s fall from thrills to farce

वैसे, यह भी ठीक है कि इस बार उन्होंने इस तरह की फिल्म के निर्देशन में खुद के हाथ ‘गंदे’ नहीं किए हैं। इसका जिम्मा उन्होंने अनुकल्प गोस्वामी के ऊपर मढ़ दिया है। लिखा भी उन्होंने ही है, और निर्देशित भी उन्होंने ही किया है।

फिल्म के हीरो कपिल शर्मा का तो यह हाल है कि उनसे ज्यादा यो यो हनी सिंह का 'स्क्रीन प्रजेंस' ज्यादा बढ़िया लगता है। लेकिन, इस सबके उलट, ‘संस्कारी’ बहू के रूप में त्रिधा चौधरी और बहुभाषी पादरी के रूप में असरानी फिल्म के बाद तक याद रह जाते हैं।

वेब सीरीज ‘आश्रम’ से चर्चित त्रिधा चौधरी को और बेहतर प्रोजेक्ट तलाशने चाहिए। उनमें संभावनाएं नजर आती हैं। लेकिन, सबसे खास अनुरोध अब्बास-मस्तान से है। वह अपनी उस खास फिल्ममेकिंग पर वापस लौटें जिसके लिए वे जाने जाते हैं। फिल्मों का नया दौर भी उनकी ही तरह की फिल्मों का है। कुछ नहीं तो उन्हीं पुराने बॉबी देओल और अक्षय खन्ना के साथ ‘हमराज’ का ही पार्ट-2 बना लें।



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