साल 2024 के लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण सम्पन्न हो जाने के बाद अब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार का शपथग्रहण समारोह भी सम्पन्न हो चुका है। भाजपा ने मोदी जैसे व्यक्तित्व के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और चुनाव परिणामों से यह पूर्णतया स्पष्ट हो जाता है कि देश में मोदी के समकक्ष नेतृत्व देने वाला फिलहाल कोई अन्य नेता जनता को स्वीकार्य नहीं है।
यद्यपि, मोदी द्वारा 400 सीटों पर जीत का नारा फलीभूत नहीं पाया लेकिन मोदी के घोर विरोधी भी गाहे-बगाहे खुद के बल पर पूर्ण बहुमत प्राप्त करने के तथ्य को स्वीकार लेते ही थे। परन्तु, जब परिणाम आए तो पक्ष व विपक्ष दोनों ही अचम्भित होकर रह गए। मोदी द्वारा प्राप्त सीटों का आंकड़ा मात्र 240 रह गया, जो कि बहुमत के निर्धारित आंकड़े 272 से काफी कम था।
इन परिणामों का आंकलन करके यह स्पष्ट होता है कि जनता भाजपा द्वारा लिए गए कई फैसलों से खुश नहीं थी। अब बीजेपी को जनता के बीच व्याप्त रोष का कारण जानकर उस पर गम्भीरता से मंथन करना होगा। एक नेतृत्व यदि कुशल है तो उसे जनता के मन की व्यथा को जानकर उसका समाधान करना ही चाहिए, तभी उसके राजनैतिक भविष्य की राह सुगम हो सकेगी।
अब इसी साल पांच राज्यों, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, झारखंड एवं हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं और यदि जनता में इसी प्रकार का रोष व्याप्त रहा तो उपरोक्त राज्यों में बीजेपी की जीत लगभग असम्भव ही होगी। इस लोकसभा चुनाव के परिणामों ने यह भी प्रमाणित कर दिया है कि जनता को मात्र पांच किलो अनाज और किसानों को दो हजार रुपये प्रतिमाह देकर आकर्षित नहीं किया जा सकता है।
इसके विपरीत, इन लोकसभा चुनावों में रोजगार, महंगाई, भ्रष्टाचार, जीएसटी की अस्वाभाविक दरें, भाजपा सरकार के कई मंत्रियों व सांसदों का जनता के प्रति नकारात्मक व्यवहार, प्रशासनिक एवं शासकीय अधिकारियों द्वारा जनता के कार्यो को प्राथमिकता न देना, वर्षों से लम्बित फाइलों का शीघ्र निस्तारण न करना आदि ऐसे अनेकों कारण भी रहे जिन पर लोकमत बना। अब इन कमियों के निस्तारण पर प्रयास शुरू कर दिए जाने चाहिए, तभी आगे के चुनावों में अपेक्षित परिणाम मिल पाएंगे।
निश्चित रूप से, एक गठबंधन सरकार का नेता होने के नाते मोदी पर अनावश्यक दवाब तो बने ही रहेंगे, लेकिन एक कुशल नेतृत्व जनता के हितार्थ योजनाएं निर्धारित कर उनको सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के प्रयास में जुटा हुआ जरूर दिखना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब पूरे धैर्य और विवेक के साथ इस नई चुनौती का सामना जरूर करना चाहिए।

(लेखक आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं और यहां व्यक्त विचार उनके स्वयं के हैं)






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