दक्षिण-पश्चिम मानसून बढ़ रहा है आगे, धीरे-धीरे कम होगी गर्मी


दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में प्रवेश कर चुका है और अब यह नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश तथा त्रिपुरा, मेघालय और असम के अधिकांश भागों सहित पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश भागों की ओर बढ़ चुका है।

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के शेष भागों, पश्चिम मध्य अरब सागर के कुछ भागों, दक्षिण-पूर्व अरब सागर और लक्षद्वीप क्षेत्र के अधिकांश भागों, केरल, माहे के अधिकांश भागों, दक्षिण तमिलनाडु के कुछ भागों, मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र के शेष भागों; बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्व के कुछ और भागों, पूरे नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश भागों और त्रिपुरा, मेघालय और असम के अधिकांश भागों में आगे बढ़ चुका है।

Read in English: Southwest Monsoon advanced into most parts of Northeast India

इस हफ्ते के दौरान मध्य अरब सागर के कुछ और भागों, दक्षिण अरब सागर के शेष भागों, लक्षद्वीप क्षेत्र और केरल, कर्नाटक के कुछ भागों, तमिलनाडु के कुछ और भागों, दक्षिण-पश्चिम और मध्य बंगाल की खाड़ी, उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के शेष भागों और असम और मेघालय तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ भागों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

निचले क्षोभमंडल स्तरों में पूर्वोत्तर असम और आसपास के क्षेत्रों में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। निचले क्षोभमंडल स्तरों में बंगाल की खाड़ी से पूर्वोत्तर राज्यों तक तेज़ दक्षिण-पश्चिमी/दक्षिणी हवाएँ चल रही हैं। इसके प्रभाव में अगले सात दिन के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ व्यापक रूप से हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। इसी दौरान दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी और बहुत भारी वर्षा तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। मेघालय में भी अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है।

उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के इलाकों में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और इसके ऊपर से निचले क्षोभमंडलीय स्तरों में पश्चिमी बांग्लादेश तक एक द्रोणिका बनी हुई है। इसके प्रभाव में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदान, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा में गरज, बिजली और तेज़ हवा के साथ छिटपुट से लेकर हल्की और मध्यम वर्षा होने की संभावना है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में एक कतरनी क्षेत्र बना हुआ है और मध्य क्षोभमंडल स्तरों में दक्षिण केरल से दूर दक्षिणपूर्व अरब सागर पर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। केरल तट पर तेज़ पश्चिमी हवाएं चल रही हैं। इसके प्रभाव में अगले सात दिन के दौरान केरल और माहे, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, कर्नाटक में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ व्यापक रूप से हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, रायलसीमा में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। केरल और माहे में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।

अगले पांच दिन के दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट होने की संभावना है।

देश के बाकी हिस्सों में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन होने की संभावना नहीं है।



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