हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है –‘ यत्र नार्यस्ते पुजंते रमंते तत्र देवता’ यानी जहां नारी की पूजा होती है वहां ईश्वर का वास होता है। उपनिषदों में कहा गया है- ‘एकम सत विपरह बहुदा वदंथी’- इस दुनिया में केवल एक सच्चाई है जिसे अनेक तरह से बताया गया है। पुरुष और महिला उस परम शक्ति की दो महत्वपूर्ण रचनाएं हैं जो बल, ताकत और स्वभाव के लिहाज़ से एक बराबर हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों और समाज में महिलाओं को इतना उच्च दर्जा प्राप्त था लेकिन सदियों से महिलाओं को समाज में उनके अधिकारों से वंचित रखा गया और उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से कई यातनाएं दी गईं। (Read in English: International Women’s Day: Declining Sex Ratio Is A Cause For Concern)






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