अगस्‍त क्रांति : 'भयावह' स्थितियों में लड़ाई का 'अहिंसक' तरीका

8 अगस्‍त, 1942 को पारित ‘भारत छोड़ो’ संकल्‍प से भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक मोड़ की शुरुआत हुई। गांधी जी को लगा कि सत्‍य और अहिंसा के आदर्श की अग्निपरीक्षा की घड़ी आ गई है। विश्‍व युद्ध का दौर था। भारत पर कठोर साम्राज्‍यवादी शासन की तानाशाही जारी थी। धुरी राष्‍ट्रों से हमारी मातृभूमि पर हमले की धमकियां मिल रही थीं। ऐसे माहौल में स्‍वतंत्रता सेनानी एक ऐसी मानवीय रणनीति बनाने में लगे थे जिसमें हत्‍याओं, विनाश और विश्‍वासघात की कोई जगह न हो, ताकि पुरानी सभी गलतियों को सही किया जा सके। उन्‍होंने अपनी इस मुहिम में जीत हासिल कर न सिर्फ अपने आप को सही साबित किया बल्कि मानवता को सभ्‍यता का एक अनोखा पाठ भी सिखाया।


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