अब की बार स्वच्छ यमुना धार का नारा लगाते हुये यमुना भक्त दो दिन पूर्व ही दिल्ली में प्रवेश कर गये। लाखों यमुना भक्तों की सुनामी को दिल्ली पुलिस भी नहीं रोक पायी। 20 मार्च को यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा अपने पड़ाव स्थल बदरपुर बार्डर से सुबह 11 बजे प्रारम्भ हुयी जो दिल्ली में लाखों यमुना भक्तों के साथ प्रवेश कर गये। यात्रा के प्रारम्भ में चल रही गौ माता उसके बाद बैल गाड़ी और फिर गुरूकुल के पीत वस्त्रधारी बालका-बालिकाओं की टोली उसके बाद यात्रा का मुख्य मंच के बाद चलता लाखों यमुना भक्तों की सुनामी कुछ अलौकिक दृश्य को प्रस्तुत करती है। लाखों की संख्या में ब्रज से दिल्ली तक पहुॅचे यमुना भक्त उसी उत्साह और उमंग से परिपूर्ण नजर आये जैसा कि वह यात्रा के प्रथम दिवस पर थे। यमुना भक्तों को रोकने के लिये पुलिस प्रशासन द्वारा नीतियाँ तो तैयार की गई थी परन्तु वह सारी फ्लाप साबित हुयी जिसका कारण अत्याशित संख्या में यमुना भक्तों का होना था। ब्रजवासियों की इस संख्या को देख प्रशासन माथे से पसीना पोंछता नजर आया और दिल्ली के अब तक दिल्ली के यातायात नियमों का हवाला दे टैक्टरों पर रोक लगाने वाले पुलिस प्रशासन द्वारा यात्रा में सम्मिलित लाखों पदयात्रियों और हजारों की संख्या में सम्मिलित चार पहिया वाहन, टेक्टरो और ट्रकों के लिये रास्ता खाली करवाया गया।
यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकान्त शास्त्री एवं राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ ने कहा कि ब्रज से लाखों साधु-सन्त, भागवताचार्य, ब्रजवासी और किसान यहाँ जीवन की मूल भूत आश्वकताओं में सबसे प्रमुख स्वच्छ पानी मांगने आये है कोई आरक्षण या नौकरी मांगने नहीं आये। आज ब्रजवासी और प्रत्येक सनातन धर्म में आस्था रखने वाले व्यक्ति की आराध्या यमुना जो उसके किनारे बसने वालों के पेय और सिंचाई जल की आवश्यकता पूर्ति का भी साधन है और उसके पूज्यनिया भी हैं। पवित्र धार्मिक नदी में यदि जहरीला जल दिया जाय और उस जहरीले जल की बजह से किसी के घर में गन्दा पानी पीके युवा पीढी कैंसर आदि रोगो से मर रही हो तो क्या वह स्वच्छ अविरल और निर्मल जल की भी मांग भी नहीं कर सकता । अगर कर सकता है तो आज लाखो यमुना भक्त और ब्रजवासी केन्द्र सरकार से आस्था, धर्म और जीवन की रक्षा के लिये उसी अविरल और यमुना की मांग कर रहे है।
पूर्व कृषि मंत्री चै. लक्ष्मीनारायण ने कहा कि यदि सरकार यमुना भक्त ब्रजवासियों की मांग नहीं मानती है तो 21 मार्च से वह अपने समर्थकों के साथ अनशन प्रारम्भ कर देगे।
एम एल सी लेखराज सिंह ने कहा कि सरकार को यमुना समस्या को हल करने के लिये यमुना भक्तों की मांग मान लेनी चाहियें।
आचार्य बद्रीश जी, मृदुलकान्त शास्त्री एवं पंकज शास्त्री ने कहा कि जिस सरकार से सभी को इतनी आशा थी कि वह पहले दिन ही यमुना भक्तों की मांग मान लेगी उस सरकार का ऐसा व्यवहार अकल्पनिय था। जो साधु सन्तों की सरकार है जिसकी जल संसाधन मंत्री स्वयं साध्वी है वह सन्तों की मांग न माने यह विश्वसनिय नहीं है। फिर भी यमुना भक्त अपनी संकल्प पर अडिग है और अडिग रहेगेे।
भारतीय किसान यूनियन भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह एवं राष्ट्रीय मुख्य महासचिव राजेन्द्र प्रसाद शास्त्री ने कहा कि किसान बिना यमुना लिये पीछे नहीं हटने वाले है। अगर सरकार मांग नहीं मानती है तो हजारों हजार किसान दिल्ली पहुॅचायेगा और यही डेरा डालकर रहेगा हमारी मांगे नहीं मान ली जाती है।
यमुना मुक्तिकरण अंिभयान के प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी, भाकियू भानू के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष केशव देव सिंह एवं भाकियू भानू के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ये न समझे कि यमुना भक्त थक गये है। यमुना भक्तों की संख्या कम नहीं होगी बल्कि दिनों दिन वह बढती ही जायेगी। लाखों ब्रजवासी अभी ब्रज में दिल्ली आने के लिये आतुर बैठा हुआ है। इसलिये सरकार जल्द भक्तों की बात मान लें।
इस अवसर पर पूज्य देवकी नन्दन जी महाराज, पुष्टिमार्गिय आचार्य श्री शरद बाबा माण्डवी वाले, श्री भूषण बाबा, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
सरकार से यमुना भक्तों की हुयी अनौपचारिक वार्ता
लगातार अपने ध्येय की ओर अनवरत बढ रहे यमुना भक्तों को लेकर केन्द्र सरकार में चिन्ता की लकीरे और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लग गया है। यमुना भक्तों को मनाने में जुटी सरकार द्वारा यमुना भक्तों वार्ता के बुलाया गया। अभियान के संरक्षक पंकज गोस्वामी जी महाराज ने बताया कि सरकार से वार्ता हो रही है पर सरकार अपनी परिस्थतियों का हवाला देकर यमुना भक्तों की मांग को पूरा करने में कुछ महीनों का समय मांग रही है। उन्होने बताया कि सरकार द्वारा यमुना समस्या को हल करने के लिये सरकार द्वारा कोई प्रगति नहीं की गयी है। सरकार के इस रवैये पर यमुना भक्तों ने अपना रूख साफ दो टूक कह दिया कि जब तक यमुना भक्तों की मांग नहीं मानी जाती यमुना भक्त मानने वाले नहीं है। बिना यमुना के लिये यमुना भक्त लौटेगे नहीं।
हजारों की संख्या में पुलिस बल रहा मौजूद
यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में चल रहे लाखों साधु-सन्तों, किसानो और ब्रजवासियों को देख पुलिस प्रशासन द्वारा हजारों की संख्या में पुलिस बल तैनात किया जो संभव परिस्थिती के लिये पूर्ण रूप से तैयार थे। तैनात किये पुलिस बल में अर्ध सैनिक बल ( आर.ए.एफ ) की भी कई टुकडि़या मौजूद थी जिनमें हजारों की संख्या में पुलिस बल पदयात्रा के चारों ओर उपस्थित रहा।
दिल्ली का यातायत रहा हाँफता रहा
यमुना मुक्तिकरण अभियान के लाखों यमुना भक्तों के दिल्ली में घूसते ही दिल्ली की यातायात व्यवस्था चर मरा गयी। लाखों यमुना भक्तों पदयात्रा के चलते दिल्ली ट्रेफिक पुलिस को कई जगह का रूट डायवर्ट करना पड़ा। इसके बावजूद भी दिल्ली का ट्रेफिक 20 मार्च को हाँफता रहा।
आश्रमचैक पर की सभा और हजरत निमाजु़दीन पुलिस स्टेशन के सामने चैराहे को किया जाम
बदरपुर बार्डर से जंतर-मंतर के लिये चले यमुना भक्तों के लाखों के काफिले ने दिल्ली के मुख्य आश्रम चैक पर बैठ तकरीबन 45 मिनट तक विश्रााम कर सभा की जहाँ सन्तों और अभियान के पदाधिकारियों द्वारा यमुना भक्तों सम्बोधित कर निर्देश भी दिये गये। इसके बाद यमुना भक्त जब जंतर मंतर के लिये बडे तो पुलिस ने हजरत निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन के सामने चैराहे पर पुलिस ने बैरिगेटिंग लगा यमुना भक्तों का रास्ता मोड़ने की कोशिश की गई जिस पर भाकियू के आक्रोशित किसानों ने दोनो रोडो को रोक जाम लगा दिया। और तकरीबन 1 घंटे तक जाम लगाये रखा उसके बाद अभियान के कार्यकर्ताओं द्वारा आगे जाने का रास्ता देखा गया और यमुना भक्तों द्वारा चयनित रास्ते पर यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा आगे बढी।






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