खारा व दूषित पेयजल पीने का मजबूर हैं ग्रामीण
खारे पानी की समस्या से जूझते ग्रामीण प्रदर्शन करते हुए
गोवर्धन। गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र के एक गांव में आजादी के 67 साल बीतने के बाद भी शुद्ध पीने का पानी यहां के वासिन्दों को नसीब नहीं हुआ है। चुनावों के समय सभी पार्टियों के नेता इस समस्या से निजात दिलाने का आश्वासन तो देते हैं लेकिन चुनाव के बाद वायदा सिर्फ वायदा ही रह जाता है। दूषित पेयजल से गांव के लोग गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे हैं पिछले तीन वर्ष में 27 लोगों की असमय इसी बीमारी से मौत हो चुकी है। ग्रामीण इसे कैंसर से मौत बताते हैं वही स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे और ही नाम दे रहे हैं। दूषित पेयजल को ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी इस समस्या का निदान किसी के पास नहीं है। जिला प्रशासन भी ग्रामीणों की इस समस्या से मुॅह फेरे हुए है।
इस अंजान बीमारी से असमय काल के गाल में समा रहे लोग मथुरा सदर तहसील के गांव नारायनपुर के वासिन्दे हैं। करीब साढ़े तीन सौ घरों एवं 3 हजार के करीब आबादी वाला यह गांव दलित बाहुल्य है। गांव में सिर्फ जाटव जाति के लोग ही निवास करते है तथा सभी लोग खेती-बाड़ी और मजदूरी पर निर्भर हैं। गांव में न तो एक भी हैंडपंप है तथा कुंआ भी नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार गांव का पानी बेहद खारा होने के कारण गांव से दो किलोमीटर दूर बोरिंग कराई गई जिसमें ग्रामीणों ने हर घर से चन्दा एकत्र कर 10 लाख रुपए की रकम जुटाकर निजी स्तर पर पाइप लाइन से गांव तक पेयजल की सप्लाई की व्यवस्था की लेकिन अफसोस कि इस बोरिंग का पानी भी बेहद खराब है। ग्रामीण लोचन सिंह का कहना है कि पानी भरे वर्तन में 12 घंटे के बाद कीड़े पैदा हो जाते हैं लेकिन कोई दूसरा विकल्प ना होने के कारण ग्रामीण इसी पानी को पीने एवं खाना बनाने में उपयोग करने के लिए मजबूर हैं। इसी का परिणाम है कि अधिकांश ग्रामीण इस पानी से गंभीर बीमारियों का शिकार होकर असमय मौत का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो गांव के बच्चे से लेकर बूढे तक किसी ना किसी बीमारी से ग्रसित हैं। कई बार ग्रामीण अपनी इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों के दर पर जाने के साथ जिला प्रशासन से भी समस्या से निजात दिलाने गुहार लगा कर थक गए हैं। बुजुर्ग ग्रामीण प्रभूदयाल शेर सिंह, फतेह सिंह, अमर सिंह आदि ने बताया कि पिछले तीन वर्ष के अंतराल में गांव में करीब 27 लोगों की इस रहस्यमय बीमारी से मौत हो चुकी है। ग्रामीण इस बीमारी को कैंसर बता रहे हैं। बताया गया है कि गांव के ही सोहल लाल पुत्र निनुआराम, उसकी पत्नी वीरमती तथा 27 वर्षीय बेटा जयराम कैंसर से कुछ दिन पूर्व ही मौत हो गई। एक माह पूर्व 33 वर्षीय रामकिशन पुत्र गनेशीलाल, फूलवती पत्नी विजेन्द्र की भी इसी बीमारी से मौत हुई थी। वर्तमान में भी गांव के तीन युवक किशोर पुत्र वासुदेव, रामवीर पुत्र घूरमल और लाल सिंह पुत्र बिस्साराम भी इसी बीमारी से ग्रसित हैं और आगरा के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं जहां इनका इलाज चल रहा बताया गया है। ग्रामीणों की मानें तो एक माह पूर्व जिलाधिकारी के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में लगाए गए स्वास्थ्य परीक्षण कैंप में जांच के बाद चिकित्सकों ने इस दूषित पानी की वजह से 187 बच्चों व किशोर एवं किशोरियों को दांतों की बीमारियों से ग्रसित तथा 250 लोगों को घुटने एवं कुहनी के जोड़ो में हड्डियों की बीमारी से ग्रसित घोषित किया था। यहां के पेयजल की जांच के बाद पेयजल को ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिम्मेदार माना था। इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. बी.एस. यादव का कहना है कि ग्रामीणों की मौत कैंसर से नहीं पुरानी बीमारियों के चलते हुई है। उन्हौने बताया कि एक कैंसर के खिलाफ लड़ रही संस्था एवं उनकी टीम ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने एवं पेयजल की जांच के बाद पेयजल को तो पीने योग्य नहीं पाया लेकिन यह पानी ग्रामीणों को हड्डियों की बीमारियां जरुर दे रहा है। कैंसर जैसी कोई बीमारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में लगातार कैम्प कर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक उपचार मुहैया करा रहे हैं। सीएमओ डा. यादव ने स्वीकार किया कि इस दूषित पानी से ही हड्डियों की बीमारी इन लोगों में विकलांगता पैदा कर रही है। कई लोगों को विभाग की आंर से विकलांग प्रमाण पत्र भी जारी किए गए हैं।






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