बाबा जयगुरुदेव आश्रम में अनुयाईयो द्वारा मुक्ति दिवस के रूप मनायी गयी 23 मार्च

जय गुरूदेव आश्रम में जय गुरूदेव ध्वज को पूजते पंकज बाबा

मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम में आज 23 मार्च को मुक्ति दिवस के रूप में हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पं0 मृत्युन्जय झा ने पूजन कराया तथा संस्था प्रमुख पंकज जी ने जयगुरुदेव ध्वज फहराया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि यह दिन आपात्काल समाप्त होने के बाद बाबा जयगुरुदेव जी के दिल्ली तिहाड़ जेल से मुक्त होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। आज 39वां मुक्ति दिवस है। यह दिन बहुत लौकिक और पारलौकिक रहस्यों से भरा है। इसका इतिहास बड़ा दर्दीला है। जब जब महापुरुष इस धरा पर आये उन्होंने लोगों के कल्याण का कार्य किया। लेकिन दुर्भाग्यवश लोगों ने उनका विरोध किया और सताया भी। लेकिन उन्होंने अपना सत्संकल्प नहीं छोड़ा।

उन्होंने कहा कि हम लोग अपने असली घर सतलोक को भूल गये और संसार में ऐसे फंसे कि जाने का रास्ता नहीं पा सके। संत सत्गुरुओं ने हमें धर्म अधर्म, सत्य असत्य का ज्ञान कराया और निजघर जाने का सरल रास्ता नाम योग बताया। जब समर्थ सतेगुरु मिल जाते हैं तो हमारी आत्मा को शब्द से जोड़ देते हैं और आत्मा निजघर पहंुच जाती है। बाबा जयगुरुदेव ने करोड़ो लोगों को इस साधना में लगाया। आज के दिन ईष्र्या, द्वेष त्याग कर नित्य सुबह शाम भजन करने का संकल्प लें। आगामी 18 से 21 मई तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में आयोजित होने वाले बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के तृतीय वार्षिक भण्डारा महापर्व में भाग लें। उन्होंने अमर शहीदों को नमन करते हुये कहा आज अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु का बलिदान दिवस है। देश के महान् सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें आजादी दिलाई है। इस धरोहर को हमें सदा सुरक्षित रखना है और शहीदों की अमरगाथा को याद करना और उनके त्याग और बलिदान से प्रेरणा प्राप्त करना है। राष्ट्रीय उपदेशक डा0 करुणाकान्त ने कहा कि 1970 के दशक में बाबा जयगुरुदेव जी अध्यात्मवाद व धर्म सन्देशों के साथ समाज सुधार, आम जनता के हितों का भी संदेश देते थे। देश की जनता बड़ी संख्या में बाबा से जुड़ गई। इसी बीच देश में 25 जून 1975 को आपात्काल लगा कर जनता के मौलिक अधिकार छीन लियेे थे। बाबा जयगुरुदेव जी भी 29 जून 1975 से 22 मार्च 1977 तक बंदी रहे। जयगुरुेदव धर्म प्रचारक संघ ने 9 दिसम्बर 1976 को आपात्काल की ज्यादतियों के विरोध में सत्याग्रह किया था और हजारों लोग जेल गये। समारोह में उपाध्यक्ष मनुभाई डी0 पटेल, चरन सिंह, सन्तराम चैधरी, अनिल ठाकुर, महेन्द्र यादव सहित हजारों सत्संगी व पे्रमी स्त्री पुरुषों ने हिस्सा लिया।


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