नई दिल्ली : कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से असम तक भगवान श्रीराधाकृष्ण के भक्तों की संख्या करोड़ों में है। जो भारतीय विदेशों में जाकर बस जाते हैं, उनके मन में भी हमेशा ललक रहती है कि जब वे भारत आऐं तो अपने तीर्थ क्षेत्रों का दर्शन अवश्य करें। परंतु आधुनिकता की चकाचैंध में ब्रज-वृन्दावन का प्राचीन स्वरूप एवं प्राचीन स्थान खो गऐ हैं।

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