... एक रात को दो बजे, जब अचानक नींद खुल गई तो टीवी से 'उलझ' बैठे और चैनल सर्फ करते-करते 'भोजपुरी टेरीटरी' तक जा पहुंचे। किसी मूवी चैनल पर निरहुआ की फिल्म 'बिदेसिया' आ रही थी। भोजपुरी में ऐसी फिल्में भी बनती हैं, जानकर अचंभा हुआ। नौटंकी विधा को फिल्म विधा के साथ गूंथकर बनाई गई यह फिल्म जब देखना शुरू किया तो फिर चैनल बदल ही नहीं पाए। जरूरी नहीं है कि मिठास और श्रम की भाषा भोजपुरी में 'बकवास' फिल्में ही बनती हैं, यहां 'बढ़िया' सिनेमा भी है। भोजपुरी सिनेमा के पुराने रसूख और मौजूदा स्थिति पर ढेर सारी बातें करने के लिए आज हमारे साथ मौजूद हैं, भोजपुरी संवेदनाओं से खास लगाव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार और साहित्य समालोचक प्रमोद कुमार पांडेय...। पूरा आलेख पढ़ने व साक्षात्कार में सतत हिस्सा लेने के लिए अभी सब्सक्राइब करें...






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