‘मुक्त छंद’ छंद मुक्त कविता नहीं है। जब हम मुक्त छंद कहते हैं तो हम छंद की परिधि में होते हैं। 'परिमल' की भूमिका में निराला ने एक मार्मिक बात कही कि मुक्त छंद से काव्य में एक स्वाधीन चेतना आती है।
‘मुक्त छंद’ छंद मुक्त कविता नहीं है। जब हम मुक्त छंद कहते हैं तो हम छंद की परिधि में होते हैं। 'परिमल' की भूमिका में निराला ने एक मार्मिक बात कही कि मुक्त छंद से काव्य में एक स्वाधीन चेतना आती है।
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