सिर मुड़ाकर सनातन गोस्वामी के शिष्य संकीर्तन करते हुए श्रीगिर्राज महाराज की परिक्रमा करते हुए
संपन्न हुआ करोड़ी मेला
मथुरा। गोवर्धन का प्रसिद्ध मुडि़या पूनौ मेला आज भारी भीड़ के साथ संपन्न हुआ। सुबह मुडि़या भक्तों की संकीर्तन यात्रा नाचते-गाते और अपने गुरू के चरणों मंे ध्यान रख गिरिराज महाराज को नमन कर की गयी।
कस्बे में निकाली संकीर्तन यात्रा में सिर मुड़ाकर मुडि़या भक्तों की टोली प्रभु संकीर्तन करते निकली। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। मुडि़या पूनौ मेला इन्हीं मुडि़या भक्तों की संकीर्तन यात्रा के चलते निकाला जाता है। इसी कारण इसका नाम मुडि़या पूनौ मेला रखा गया है। पुराने लोग बताते हैं कि ब्रज की खोज रूप और सनातन गोस्वामी ने की थी। सबसे पहले ब्रज की खोज करने वाले रूप और सनातन गोस्वामी मूलतः पश्चिम बंगाल से ही यहां आये थे। उनके काफी संख्या में भक्त यहां उनकी सेवा में जुटे हुए थे। उनके निधन के मौके पर उनके शिष्यों ने सिर मुड़ाकर गोवर्धन में भजन-कीर्तन के साथ डोला निकाला था। तभी से मुडि़या पूनौ मेला का यह पर्व आज तक निरंतर जारी है। रूप और सनातन गोस्वामी परिवार के लोग आज भी मुडि़या पूनौ मेला के दिन गोवर्धन में संकीर्तन यात्रा और उसके बाद भगवान के डोले के साथ सायंकाल निकलते हैं। नाचते-गाते मुडि़या भक्त कस्बे की परिक्रमा करते हैं। चकलेश्वर मंदिर से यह संकीर्तन शोभायात्रा मानसी गंगा होकर निकलती है। जगह-जगह आज इस यात्रा पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इसी के साथ आज यह मुडि़या पूनौ का मेला संपन्न हो गया।






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