यमुना में डुबकी लगाकर भाई-बहिनों ने की यम की फांस से मुक्ति की कामना

मथुरा। भैयादूज (यमद्वितीया) का पर्व आज शुक्रवार को परम्परागत ढंग से श्रद्धा के साथ मनाया गया। बड़ी संख्या में मथुरा स्थित विश्राम घाट पर पहुॅचे श्रद्धालु भाई-बहिनों यमुना में एक साथ डुबकी लगाकर यम की फांस से मुक्ति की कामना की। स्नान के बाद भाई-बहनों ने यहां स्थित यमराज के मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की। मान्यता है कि यम द्वितिया पर्व पर भाई-बहनों के एक साथ यमुना में डुबकी लगाने के बाद विश्राम घाट स्थित यमराज मंदिर में पूजा करने से यम फांस से मुक्ति मिल जाती है तथा अकाल मृत्यु भी टल जाती है। यहां स्थित यमराज मंदिर देश का एक मात्र मंदिर है और वर्ष में एक बार यम द्वितिया के दिन यहां दर्शन करने का विशेष महत्व है।  

पतित पावनी यमुनाजी में लाखों श्रद्धालु भाई-बहिनों द्वारा एक साथ डुबकी लगाकर यम की फांस से मुक्ति की कामना की गई। घर-घर बहिनों द्वारा भाईयों के माथे पर टीका करने और उपहार लेने की धूम रही। मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बाहर से आये श्रद्धालुओं के कारण शहर में गहमा गहमी रही। ब्रजवासियों के अलावा बाहर से आये श्रद्धालुओं का अर्द्धरात्रि के बाद से ही यमुना के घाटों की ओर जाना प्रारम्भ हो गया, सुबह होते-होते श्रद्धालुओं की भीड़ में वृद्धि होती गयी। श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ का दबाव विश्राम घाट पर रहा। श्रद्धालु भाई-बहिन एक दूसरे का हाथ पकड़े यमुना में स्रान करते हुए प्रसन्न चित्त नजर आ रहे थे और अपने आपको धन्य मान रहे थे। इस दौरान जै यमुना मैया के जयकारे गुंजायमान हो रहे थे। स्रान करने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा सूर्यनारायण को जल चढ़ाया तथा माँ यमुनाजी महारानी की दुग्ध, पेड़ा, दीप, धूप, पुष्प आदि से पूजा अर्चना की गयी। इसके पश्चात बहिनों द्वारा भाईयों के माथे पर टीका कर भोजन कराया गया। भाईयों द्वारा बहिनों को उपहार प्रदान करते हुए उनके सम्मान को बनाये रखने का वचन दिया गया। यमद्वितीया पर्व को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन तथा नगर पालिका परिषद द्वारा व्यापक व्यवस्थायें की गई थी। स्रानार्थियों को गहरे पानी में जाने से रोकने को बल्लियां लगाकर बैरीकेटिंग की गई थी। नावें लगाई गई थी। स्रानार्थियों को बार-बार लाउडस्पीकर से चेतावनी दी जा रही थी। नगर पालिका परिषद द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से नाव, गोताखोरों की व्यवस्था की गई थी। जिसमें कुछ नावों द्वारा प्रशासनिक अधिकारी निरंतर गश्त कर मेले पर नजर रख रहे थे। घाटों पर विशेष सफाई के साथ प्रकाश की समुचित व्यवस्था की गई थी। सहायता शिविर में कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे। वहीं पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के साथ ही यातायात की माकूल व्यवस्थायें की गई थी। विश्रामघाट पर प्रवेश व निकास द्वार बनाये गये थे। मोटर वोट से तैराक निरंतर गश्त करते हुए स्रानार्थियों पर नजर रख रहे थे। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने कड़े बंदोवस्त किये गये थे। विश्राम घाट व अन्य घाटों की ओर जाने आने वाले मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था। इसके अलावा माथुर चतुर्वेद परिषद सहित अन्य समाज सेवी संगठनों द्वारा स्रानार्थियों की सहायतार्थ खोया पाया शिविर, चिकित्सा शिविर लगाये गये थे।

भैया दौज के पर्व पर घर-घर बहिनों द्वारा भाईयों के माथे पर टीका कर मुंह मीठा कराया गया। इस पर भाईयों द्वारा बहिनों को उपहार दिये गये और उनके सम्मान को बनाये रखने का वचन दिया गया। घर-घर महिलाओं द्वारा दौज की कथा का वाचन और श्रवण करते हुए पूजा करने की धूम रही मिठाईयों की दुकानों पर भीड़ रही। मंदिर द्वारिकाधीश व श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बाहरी यात्रियों के कारण शहर में गहमा गहमी का माहौल व्याप्त रहा।


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