लोकतंत्र की आत्‍मा है मतदाताओं की भागीदारी

लुईस लामॉर ने ठीक ही कहा है कि लोकतंत्र को प्रभावशाली बनाने के लिए हमारे अंदर भागीदारी की भावना होनी चाहिए। हमें केवल पर्यवेक्षक ही नहीं होना चाहिए। जो वोट नहीं डालता उसे शिकायत करने का अधिकार नहीं है। लोकतंत्र को जनता की भागीदारी के विस्‍तार के रूप में देखा जा सकता है। सरकार बनाने में सर्वोच्‍च शक्ति जनता के हाथ में होती है और जनता चुनाव की प्रतिनिधि प्रणाली के माध्‍यम से उस शक्ति का सीधे या परोक्ष रूप में उपयोग करती है। लोकतंत्र नागरिकों की उचित और निष्‍पक्ष भागीदारी के बिना विफल हो जाएगा। प्रत्‍येक वोट हमारे लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है।


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login



Related Items

  1. विरासतपरस्ती और जमींदारी ने लोकतंत्र को बनाया गिरवी

  1. लोकतंत्र की वर्तमान उदासी और युवाओं की सियासत से दूरी

  1. भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष कब बनेगा बेहतरीन विकल्प?




Mediabharti