शौर्य का पर्याय थे बिरसा मुंडा

अंग्रेजों ने जब आदिवासियों से उनके जल, जंगल, जमीन को छीनने की कोशिश की तो उलगुलान यानी आंदोलन हुआ। इस उलगुलान का ऐलान करने वाले बिरसा मुंडा ही थे।लेखिका महाश्वेता देवी का आदिवासी जीवन पर लिखा ‘चोट्टि मुंडा और उसका तीर' उपन्यास आदिवासी जीवन के साथ ही उनके जिस नायक के संघर्ष पर केन्द्रित है, वह हैं बिरसा मुंडा। इस उपन्यास में महाश्वेता देवी ने आदिवासियों द्वारा अपनी आजादी छिन जाने की आहट से बेचैन होने और बिरसा मुंडा के नेतृत्व में उस आजादी को बचाने के संघर्ष को बड़ी खूबसूरती से गूंथा है। बिरसा मुंडा वास्तव में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई के महानायक थे।


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login



Related Items

  1. अन्याय के विरुद्ध विरोध करने की प्रेरणा गाथा है बिरसा मुंडा का जीवन




Mediabharti