रेल बजट के 'ट्रैक' से उतर जाने के बाद प्रणब दा ने आम बजट को संसद में पेश कर दिया। पांच राज्यों में हालिया हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए इस बजट से आम आदमी को कुछ 'खास' मिलने की उम्मीदें जग गई थीं। लेकिन कमोबेश उन उम्मीदों पर पानी ही फिरा है। तमाम तरह की प्रतिक्रियाओं के बीच जैसा कि भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा भी कि इस तरह का बजट तो एक 'क्लर्क' भी बना सकता था। यदि पूरे बजट पर निगाह डाली जाए तो यह वैसा ही साधारण बही-खाता जैसा लगा जिन्हें गांव में हर साल दिवाली पर अपडेट किया जाता है।






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