पवन गौतम

पवन गौतम समाचारएक्सप्रैस.कॉम के संपादक हैं।

इंदौर स्थित बड़े गणेश मंदिर की स्थापना साल 1901 में हुई थी। इसके बाद, धीरे-धीरे इंदौर का जिस तरह से विकास हुआ, उसके साथ इस मंदिर की ख्याति भी बढ़ी। जो भक्त भगवान खजराना गणेश के दर्शन करने के लिए इंदौर आते हैं, वे बड़े गणेश के भी दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं...

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देश में भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा भी मंदिर है, जहां महादेव के दर्शन करने मात्र से ही सभी पापों से मुक्ति मिलती है। गुजरात के द्वारका धाम से 17 किलोमीटर बाहरी क्षेत्र की ओर यह मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि नागेश्वर मंदिर के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती नाग-नागिन के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए इसे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। देशभर में शिव के बारह ज्योतिर्लिंग हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का दसवां स्थान है...

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दुनिया में ब्रज की होली का डंका बज रहा है। सरकार लगातार होली को प्रचारित प्रसारित कर रही है। होली की व्यवस्थाओं को व्यापक बनाया जा रहा है। होली पर ब्रज में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इसका दूसरा पहलू यह है कि ब्रजवासी लगातार होली से दूर हो रहे हैं।

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सांवरिया सेठ मन्दिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। किंवदंती यह है कि वर्ष 1840 में, भोलाराम गुर्जर नाम के एक दूधवाले ने बागुंड गांव के छापर में तीन दिव्य मूर्तियों के भूमिगत होने का सपना देखा था। उस स्थान को खोदने पर वहां भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियां मिलीं, जैसा कि सपने में देखा गया था...

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मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर, क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित काल भैरव मंदिर एक ऐसी रहस्यमयी जगह है, जहां धार्मिक, तांत्रिक और ऐतिहासिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। लगभग छह हजार साल पुराना यह मंदिर प्रभावशाली वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है...

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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और शिवालय तीर्थ महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में एलागंगा नदी और एलोरा गुफाओं के नज़दीक स्थित है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह आखिरी ज्योतिर्लिंग है। यहां की यात्रा शिवालय तीर्थ, ज्योतिर्लिंग और लक्ष्य विनायक गणेश के दर्शन से पूर्ण होती है। ये सभी तीर्थस्थल 500 मीटर के दायरे में स्थित हैं। बाहर से देखने पर घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर सामान्य मंदिरों की भांति ही दिखाई देता है, लेकिन अंदर जाकर देखने से इसकी महत्ता और भव्यता स्पष्ट होती है। इस क्षेत्र में कई अन्य धर्मावलम्बियों के भी पवित्र स्थान हैं।

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