एक जमाने में आगरा की गिनती विकसित औद्योगिक क्षेत्र के रूप में होती थी। यहां के कारखानों की गूंज देश-विदेशों में होती थी। लाखों लोग रोजगार पाते थे। हुनर और कौशल की पूजा होती थी। फिर 1993 में एक भूचाल आया। ताज महल को प्रदूषण से बचाने को सुप्रीम कोर्ट ने दखल दी और उद्योगों पर तमाम बंदिशें लगा दीं। पचास लाख की आबादी वाले इस शहर में, पिछले तीन दशकों में औद्योगिक विकास के नाम पर शून्य काम हुआ है। तसल्ली होती अगर शहर हर-भरा और प्रदूषणमुक्त हो गया होता, लेकिन वही ढाक के तीन पात, यानी माया मिली न राम…!
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