बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

चाहिए सिर्फ एक मोबाइल फोन विद इंटरनेट कनेक्शन..., जी हां..., और आ गया आपके हाथ में अलादीन का चिराग, या बंदर के हाथ  में उस्तरा...

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क्या दुनिया के लोकतांत्रिक देश वर्तमान में नेतृत्व संकट से जूझ रहे हैं? ऐसा लगता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को चलाने या मार्गदर्शन करने वाले प्रेरक नेताओं की कमी का खामियाजा जनता भुगत रही है।

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तीन दशकों से चल रही न्यायिक पहल और दर्जनों प्रतिबंधों व निर्देशों के बावजूद, आगरा में प्रदूषण के स्तर, हरित क्षेत्र के विस्तार और यमुना नदी की दुर्दशा में कोई विशेष फर्क देखने को नहीं मिल रहा है।

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दशकों से, आगरा नकारात्मक छवि का शिकार रहा है। आगरा विरोधी लॉबी ने शहर को हमेशा गंदा, असुरक्षित, प्रदूषित, धोखेबाजों से भरा और रात में ठहरने के लिए अनुपयुक्त बताया है...

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शानदार ताजमहल के लिए प्रसिद्ध होने के बावजूद, आगरा स्वच्छता और सफाई की एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। प्रतिदिन लगभग बारह सौ टन मलवा, घरेलू कूड़ा, औद्योगिक कचरा, धूल, पैकेजिंग मैटेरियल इस आगरा शहर से निकलता है...

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ताजमहल देखने आने वाले पर्यटकों पर बंदरों के हमलों की एक लंबी श्रृंखला के बाद आगरा में भय का माहौल है। पर्यटकों के एक समूह ने हाल ही में कहा कि उन्हें ताजमहल परिसर में और उसके आसपास बंदरों, कुत्तों तथा मवेशियों के हमलों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।

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