पिछले हफ्ते मॉर्निंग वॉक पर अचानक भाटिया जी से मुलाक़ात हो गई। उम्र ढल चुकी थी, चाल में ठहराव था, और आंखों में एक अजीब-सी राहत। बातचीत आगे बढ़ी तो पता चला, 42 साल बाद उन्होंने हमेशा के लिए बोरिया-बिस्तर बांध लिया और अमेरिका को अलविदा कह दिया। वजह बस इतनी थी कि अपनी जीवन संध्या में, उनको अपने शहर की मिट्टी की खुशबू ने वापस खींच लिया...
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