उस रात सब कुछ आम था। सड़क पर हल्की रौशनी, पास की चाय की दुकान से उठती अदरख की महक, और घर लौटती एक लड़की, जिसकी बस एक ही ख्वाहिश थी, कोई उसे उसके हाल पर छोड़ दे। पीछे से क़दमों की आहट आई। कुछ सेकेंड। एक चीख। फिर सन्नाटा। चेहरे पर तेज़ाब जैसा कुछ फेंका गया, इतनी तेज़ी से कि ज़िंदगी फौरन दो हिस्सों में बंट गई, हमले से पहले और हमले के बाद। यह कोई कहानी नहीं बल्कि आज के भारत की हक़ीकत है।
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