मैसूर के रहने वाले 24 साल के आनंद की कहानी दिलचस्प है। गांव के स्कूल से पढ़ाई करने वाला यह युवा कभी सोच भी नहीं सकता था कि एक दिन वह अमेरिकी क्लाइंट को सॉफ्टवेयर सॉल्युशन देगा। लेकिन, बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी ने उसे यह अवसर दिया। उसे रेलवे की सरकारी नौकरी की कतार में खड़ा नहीं होना पड़ा, क्योंकि निजी सेक्टर ने उसकी काबिलियत पहचान ली। आनंद जैसे लाखों युवाओं की तक़दीर बदलना ही प्राइवेट सेक्टर की असली ताकत है।
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