बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

मैसूर के रहने वाले 24 साल के आनंद की कहानी दिलचस्प है। गांव के स्कूल से पढ़ाई करने वाला यह युवा कभी सोच भी नहीं सकता था कि एक दिन वह अमेरिकी क्लाइंट को सॉफ्टवेयर सॉल्युशन देगा। लेकिन, बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी ने उसे यह अवसर दिया। उसे रेलवे की सरकारी नौकरी की कतार में खड़ा नहीं होना पड़ा, क्योंकि निजी सेक्टर ने उसकी काबिलियत पहचान ली। आनंद जैसे लाखों युवाओं की तक़दीर बदलना ही प्राइवेट सेक्टर की असली ताकत है।

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आज कल राजनयिक भाषा का स्तर गिरता जा रहा है, जैसा कि डोनाल्ड ट्रंप और उनके साथियों ने दिखाया है। उनकी बातचीत का तरीका बहुत ही निचले दर्जे का, अकड़ू, हठी और बेअदबी है। यह एक तरह की तहज़ीब की कमी को दिखाता है, जहां नफ़ासत, शालीनता और समझदारी की जगह सिर्फ़ गुस्ताखी, अशिष्टता और जबर्दस्ती रह गई है। कुछ बयान हादसा नहीं होते, वे जानबूझकर की गई बदतमीजी होते हैं।

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भारत में भारी बारिश से हुई त्रासदी ने अपना कहर बरपाया है। आगरा के ऐतिहासिक ताज महल से लेकर मथुरा-वृंदावन की पवित्र भूमि तक, यमुना नदी अपने किनारों से उफनकर बाहर निकली है, जिससे भारी तबाही हुई है। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवजनित विनाश है।

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सिर्फ शराब ही नहीं, आध्यात्म भी बड़ा पैसा बनाने वाला व्यवसाय बन चुका है! यूपी में योगी सरकार वृंदावन धाम का आधुनिकीकरण करके और समूचे ब्रज मंडल में भारी निवेश के जरिए, भारत के धार्मिक उद्योग को नई बुलंदियों तक ले जाना चाहती है...

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अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर अत्यधिक टैरिफ लगा दिए हैं और रूस से ऊर्जा खरीद पर रोक लगाने की धमकी दी है। ऐसे में, भारत को मजबूती से जवाब देना चाहिए। एक बड़ा कदम हो सकता है, अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, गूगल, यूट्यूब पर रोक लगाकर अपनी डिजिटल आजादी सुनिश्चित करना।

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जब मुल्क की सियासत में एक तरफ़ भगवा गंगा बह रही हो और दूसरी ओर कावेरी में लुभावनी 'गारंटियों' की बारिश हो रही हो, तब विकास की असली तस्वीर आंकड़ों की खामोश ज़ुबान में छुप जाती है।

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