आख़िर हमें इतनी तेज़ रफ्तार किसलिए चाहिए? अगर पहुंचना यमराज के दरबार में ही है, तो फिर एक्सप्रेसवे बनाने पर हज़ारों-करोड़ों रुपये क्यों बहाए जा रहे हैं...
Read More
बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।
आख़िर हमें इतनी तेज़ रफ्तार किसलिए चाहिए? अगर पहुंचना यमराज के दरबार में ही है, तो फिर एक्सप्रेसवे बनाने पर हज़ारों-करोड़ों रुपये क्यों बहाए जा रहे हैं...
Read More
क्या भारत की हजारों छोटी नदियों को अपनी पहचान खोकर कूड़े के नीचे दब जाने, सीवर में बदल जाने या अतिक्रमण की चादर ओढ़ लेने दिया जाएगा? यह सवाल अब केवल पर्यावरणविदों का ही नहीं रहा, बल्कि देश के भविष्य, जल-सुरक्षा और सभ्यतागत अस्तित्व का भी बन चुका है...
Read More
क्या उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था योगी आदित्यनाथ के शासन में वाकई में सुधरी है, या शांति सिर्फ बंदूक की नोक पर थोप दी गई है...
Read More
डोनाल्ड ट्रंप को इतिहास में कभी कोई महान जनरल नहीं मानेगा। लेकिन, जंग की व्याकरण बदलने वालों में उनका नाम जरूर दर्ज होगा। उन्होंने बता दिया है कि अब लड़ाई के लिए बंदूक ज़रूरी नहीं है। न रणभूमि, न धुएं से भरा आसमान, बस टैरिफ़, ट्वीट, धमकी और तमाशा…
Read More
भारत की विदेश नीति आज एक ऐसे डायमंड क्रॉसिंग पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां रास्ते एक ही दिशा में नहीं जाते, बल्कि कई ओर खुलते हैं। यहां रिश्ते जकड़े हुए नहीं हैं बल्कि लचीले हैं, और फैसले विचारधारा से ज़्यादा कौमी हितों पर आधारित हैं। बदलती और बेचैन दुनिया में भारत ने किसी एक खेमे में बंधने के बजाय अपने लिए खुली राह चुनी है...
Read More
कर्नाटक हाईकोर्ट का ताज़ा फैसला कोई साधारण कानूनी टिप्पणी नहीं है। यह शासन व्यवस्था की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट है। अदालत ने दो टूक शब्दों में स्वीकार किया है कि अवैध रेत खनन पर राज्य का कोई नियंत्रण नहीं बचा है। कानून थक चुका है। प्रशासन ने हथियार डाल दिए हैं। राजनीति ने आंखें मूंद ली हैं...
Read More