जीवन की आश्वस्ति तो न यहां है, और ना ही वहां...

एक तरफ़ कुछ लोग हैं जो यह कहते हैं कि जब पहली बार भारत में कोरोना के मरीज का पता चला उसी समय लॉक डाउन हो जाना चाहिए था! लॉक डाउन घोषित करने में देरी की गई। दूसरी ओर, ‘इतना लम्बा लॉक डाउन क्यों’ को लेकर भी आपत्ति है।

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