तेज वर्षा से जनजीवन अस्त व्यस्त

शहर के हृदयस्थल होलीगेट पर हुई बरसात के बाद हुए जलभराव से निकलते लोग 

जलभराव के कारण लोगों के घरों में घुसा पानी 

बरसात के बाद जनपद के चैराहे पर जाम से जूझते रहे वाहन स्वामी 

चारों ओर जलभराव से शहर में प्रवेश अवरूद्ध

मथुरा। आज शहर में तेजी से हुयी वर्षा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। पूरा शहर खुदा होने के कारण स्थान-स्थान पर जलभराव ने लोगों को रास्ता निकलना मुश्किल कर दिया। स्थिति यह थी कि पुलिस लाइन, एसएसपी कार्यालय, कलैक्ट्रेट में भी जलभराव से आवागमन अवरूद्ध हो गया। नाले-नालियों की सफाई न होने से पूरे शहर में जलभराव की स्थिति है। बीएसए काॅलेज के पीछे की कालोनियों का तो बहुत बुरा हाल है। जमुनाबिहार, आनंदपुरी, कृष्णबिहार, नवनीत नगर, प्रकाश नगर, आशापुरी, शांतिनगर, जनकपुरी, मालगोदाम रोड, राधिका बिहार, महावीर नगर, अंबेडकर कालोनी, राधा नगर, कृष्णानगर के निचले भागों, यमुना पल्लीपार, सदर, जन्मस्थान के पास लक्ष्मीनगर, ओमनगर, भूतेश्वर तिराहे के के पास रेल पुल के नीचे जलभराव और नये बस स्टैण्ड स्थित रेलवे पुल के नीचे जलभराव, गोवर्धन चैराहे पर जलभराव से पूरा इलाका अवरूद्ध हो गया। यहां निकलना मुश्किल पड़ रहा है। वहीं मसानी क्षेत्र के निचले भागों मे बनी कालोनियों में जलभराव से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। आजमपुर से लगी कालोनियों मंे भारी जलभराव लोगों के लिए मुश्किल बन गया।

पूरे शहर और आसपास के इलाकों में पानी भर जाने से लोग अपने गंतव्य तक नहीं पंहुच पाये। अनेक स्थानों पर वाहन पानी में फंस गये। आज ग्यारह बजे से ही वर्षा शुरू हो गयी जो दोपहर तीन बजे तक निरंतर जारी रही। सरकारी कार्यालयांे में कामकाज चैपट हो गया। लोग दफ्तर भी नहीं पंहुच पाये। वहीं प्राईवेट संस्थानों और बाजारों पर भी बरसात का पूरा असर देखने को मिला। दुकानदार हाथ पर हाथ रखकर बैठे थे तो ग्राहक पानी की वजह से घरों से ही नहीं निकले। शहर के अंतापाड़ा क्षेत्र में तो चारों तरफ से जल आने के कारण पूरे क्षेत्र में घुटने तक पानी में छोटे-छोटे बच्चों को जाना पड़ा। शहर के अधिकांश हिस्सों में सड़कों पर पानी भर गया। मकानों व फैक्ट्रियों में भी पानी घुस गया। भूतेश्वर बस स्टैण्ड पर चारों ओर जलभराव होने से लोगों को तो आवागमन में परेशानी हुई ही, रोडवेज की बसें भी यहां से आवागमन नहीं कर सकी। इंडस्ट्रीयल एरिया में खासा जलभराव होने से मकानों व फैक्ट्रियों में पानी घुस गया। शहर के नालों की सफाई न होने और उनमें सिल्ट जमा होने से पानी सड़कों पर फैलने के साथ ही मकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में हिलौर ले रहा था।

 


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