मथुरा में पैदा हुआ थ्री ईडियट्स का वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी प्रेमी फरहान

दिल्ली नेचर फैस्टीवल की प्रदर्शनी में खूब पसंद किए गए सत्यजीत के फोटो

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी का प्रेमी इंजीनियर सत्यजीत

मथुरा। कुछ दिनों पूर्व आई एक फिल्म थ्री ईडियट्स के तीनों मुख्य किरदार रैंचो, राजू श्रीवास्तव और फरहान कुरैशी तो आपके याद ही होंगे। मथुरा में भी एक ऐसे ही किरदार ने जन्म लिया है। जो आज भी पढ़ तो इंजीनियरिंग ही रहा है किंतु उसने भी अपने शौक से समझौता नहीं किया है बल्कि वह लगातार अभिभावकों की आकांक्षाओं और अपनी हाॅबी के बीच एक संतुलन बनाकर लगातार सीढियां चढ़ रहा है। संयोग से वह भी फरहान अख्तर की तरह इंजीनियरिंग करते हुए ‘वाइल्ड लाइफ’ फोटोग्राफी बेहद पसंद करता है। यहां अंतर बस इतना है कि फरहान के अब्बू शुरूआत में उसके इस शौक को वक्त जाया करने वाला काम मानते थे, जबकि सत्यजीत के पिता खुद उसे इसके लिए प्रेरित करते हैं। 

उसकी फोटोग्राफी के सबसे बड़े समर्थक भी वे ही हैं। उन्होेंने ही उसे आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया, नामचीन फोटोग्राफरों से मिलवाया। यह और बात है कि मां के लिए तो वह अभी तक पढ़ाई लिखाई छोड़ चिडियों के पीछे बेवजह भागने वाला बच्चा भर नजर आता है। वो तो अपने बेटे को सिर्फ, और सिर्फ एक सफल इंजीनियर बनते देखना चाहती हैं। श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर से 12 करने के बाद गाजियाबाद के आईडियल इंस्टीट्यूट आॅफ टैक्नोलाॅजी एण्ड मैनेजमेण्ट बी-टेक कर रहे सत्यजीत सिंह सैनी गोविंद नगर निवासी महावीर सिंह सैनी एवं शकुंतला सैनी के पुत्र हैं। उन्होंने हाल ही में आयोजित ‘दिल्ली नेचर फैस्टीवल’ की प्रदर्शनी में भाग लिया। इस प्रदर्शनी के लिए पहले ही प्रयास में उनके पांच चित्र प्रदर्शन के लिए चुन लिए गए। जिन्हें वहां आने वाले दर्शकों ने काफी पसंद किया। ये फोटोग्राफ्स ‘लव आॅफ नेचर’ थीम के तहत खींचे गए हैं।

इस प्रदर्शनी में देश भर से आए प्रख्यात फोटोग्राफरों व अन्य विधाओं के कलाकारों ने भाग लिया। 27 से 29 मार्च तक दिल्ली के हौज खास विलेज में लगी इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक करना है। इसके लिए उन्होंने और भी कई प्रकार के ईवेण्ट अपने कार्यक्रम में रखे थे। इस प्रदर्शनी के माध्यम से न्यू देहली नेचर सोसायटी प्रकृति प्रेमियों को एक साथ, एक स्थान पर जोड़ने व उनमें प्रकृति के प्रति जागरूकता लाने में कामयाब भी रहे। खास बात, प्रदर्शनी के बीच जितनी भी कलाकृतियों की बिक्री हुई उनकी स्मृति बनाए रखने के लिए प्रकृति ग्राम में उतने ही पौधे भी रोपे गए। पहली सफलता से उत्साहित सत्यजीत ने पत्रकारों से मुलाकात में कहा कि ‘वह एक पेशेवर फोटोग्राफर बनना चाहता है। लेकिन शिक्षा को भी पूरा महत्व देगा। इसलिए विधा और विद्या, दोनांे में सामन्जस्य बनाकर चलने का प्रयास कर रहा है। फोटोग्राफी के लिए वह अक्सर सप्ताहांत अथवा अवकाश के दिनों को ही चुनता है। जिससे शौक भी पूरा हो जाए और पढ़ाई का वक्त भी जाया न हो। वैसे, दोनों में से यदि एक को चुनने को कहा जाए तो निश्चित ही सत्यजीत की प्राथमिकता फोटोग्राफी ही होगी, ऐसा उसका कहना है।


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