मुखराई में एक सौ आठ दीपकों का चरकुला नृत्य करती महिलागोवर्धन। होली की दौज पर गाॅव मुखराई में रंगारंग हुरंगा महोत्सव के साथ अलोकिक चरकुला नृत्य का धूमधाम से आयोजन किया गया। परम्परागत आयोजन में देश बिदेश से आये शैलानियों ने जमकर आनन्द उठाया। बृज की अधिष्टात्री देवी श्री राधारानी की ननिहाल मुखराई गाॅव होली की धूम में रगंमच गया। पुराणों के अनुसार बृषभान दुलारी का जन्म की खुशी में राधारानी की नानी मुखरादेवी रथ के पहियो पर अनगिनत दीप जलाकर नृत्य किया था। वहीं समस्त ग्रामवासी परम्परा का निर्वाह करते हुए द्वापर युग से लेकर अब तक होली दौज को रंगारंग हुरंगा के बीच अलोकिक चरकुला नृत्य का आयोजन करते है इसी परम्परा को निभाते हुए ग्रामवासियों ने फाल्गुन मास की दौज को बिशाल हुरंगा एवं अलोकिक चरकुला नृत्य का भाव पूर्ण आयोजन किया। दौज की दोपहर में ग्राम की महिलाओं ने अपना सुसज्जित श्रंगार कर प्रेम से पगी लाठियों से हुरंगा खेल रहे ग्वाल वालों पर प्यार की वौंछार की। वहीे ग्वाल वालों ने हुरंगा खेल रहीं सखियों को खूब खिजाया। चरकुला नृत्य के पश्यचात संध्या होते ही मुखराई गाॅव के वासी बृज की अनूठी होली में ऐसे घुले की समूचा गाॅव होली के राग व गीतों से गूॅज उठा। ग्रामवासी नगोंडों व शहनाइयों की गूंज पर थिरकते नजर आ रहे थे। इस दोरान गाॅव की महिलाओं ने बारी बारी से परम्परागत भेश भूसा में लगभग एक कुंतल बजनी चरकुला पर अनगिनत दीप जलाकर अपने सर पर रखकर श्री राधारानी के प्रेम रस में मगन हो नृत्य करने लगी। यह नजारा देख दर्शनार्थी भाब बिभोर हो उठे। इसी बीच बृज के सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा मयूर नृत्य एवं फूलों की होली का आयोजन किया गया। जेसे ही राधा कृष्ण के रूप में पफूलों की होली प्रारम्भ हुई थी कि बिदेशी भक्त यह नजारा देख गद गद हो झूम उठे। इस अबसर पर प्रधान मान पाल चोधरी श्याम सुन्दर शर्मा भगवत स्वरूप मुरारी लाल शर्मा छीतर मल भूपेन्द्र चोधरी दानी शर्मा आदि लोग उपस्थित थे।
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