शशि कपूर रू एक आकर्षणए जो दिल चुरा ले३

1960 के दशक में सुंदर व्यक्तित्वए घुंघराले बालों और मनमोहक मुस्कान लिए शशि कपूर भारतीय सिनेमा में अपनी आकर्षक रोमांटिक छवि लिए छा गए। गंभीर कला और निर्देशन इस आकर्षण में चार.चांद लगा गए। पृथ्वीराज कपूर के बेटे राज कपूर और शम्मी कपूर के छोटे भाई शशि कपूरए कपूर परिवार के नए फूल की तरह महकने और अपनी छटा बिखेरने लगे।

पत्नी जेनिफर केंडल भी एक सफल फिल्म कलाकार थीं। बेटे करन कपूरए कुणाल कपूर और बेटी संजना भी खानदानी अभिनय के रंग में रंगे हैं और फिल्मों में कुछ भूमिकाएं भी की हैं। ष्ष्मेरे पास मां हैष्ष् ;दीवारद्ध... हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री का सबसे खूबसूरत संवाद शशि कपूर के नाम है।

शशि कपूर ;18 मार्च 1938द्ध साठ के दशक के प्रसिद्ध रोमांटिक स्टार थे जिन्हें बाद के दशकों में एक गंभीर कलाकार और प्रोड्यूसर होने की प्रशंसा मिली। इन्होंने एक्टिंग की शुरुआत मात्र छह वर्ष की उम्र से पिता पृथ्वीराज कपूर के प्रोडक्शन की फिल्म ष्शकुंतलाष् से की। फिर ष्आगष् और ष्आवाराष् फिल्मों में भी बच्चे की भूमिका में दिखे।

1953 से 1956 के बीच भारत यात्रा पर आई जेनिफर केंडल के थियोट्रिकल ग्रुप ष्शेक्सपियेरेनाष् से जुड़ने के बाद 1960 में शशि ने फिर से फिल्मों की ओर रुख किया। उनकी शुरुआती सफल फिल्मों में ष्वक्तष् और ष्जब.जब फूल खिलेष् शामिल हैं। इनकी बहुत सारी आरंभिक फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा सकीं और शशि को स्वयं को एक कलाकार के रूप में प्रमाणित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। आरंभिक दौर की सफल फिल्मों में ष्प्यार का मौसमष् और ष्चोर मचाए शोरष् थीं। 1970 के दशक में ष्दीवारष्ए ष्कभी.कभीएष् ष्त्रिशूलष्ए ष्सुहागष् और ष्काला पत्थरष्ए श्नमक हलालश् जैसी फिल्मों में अमिताभ बच्चन के साथ दूसरी मुख्य भूमिकाएं अदाकर शशि ने अपार सफलता अर्जित की। इंडो.सोवियत प्रोडक्शन के तहत अमिताभ बच्चन की फिल्म ष्अजूबाष् को निर्देशित भी किया।

शशि कपूर ने ष्फिल्म.वालाजष् के नाम से अपनी स्वयं की प्रोडक्शन कंपनी भी बनाई और कला उपयोग की कई मुख्य फिल्मों को प्रोड्यूज कियाए जिनमें शामिल हैं. श्याम बेनेगल की ष्जुनूनष् और ष्कलयुगष्ए अपर्णा सेन की ष्36 चौरंगी लेनष् और गिरीश कर्नाड की ष्उत्सवष्। मेनस्ट्रीम फिल्मों में रचनात्मक अवसरों की कमी को कला.फिल्मों खासतौर से ष्जुनूनष् और ष्कलयुगष् जैसी फिल्मों ने पाट दिया।

बहुत सारी ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में काम करके शशि ने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति बटोरी। मर्चेंट आयवरी प्रोडक्शन की ष्शेक्सपीयर वाल्लाहष् ;1960द्धए ष्बॉम्बे टॉकीष्;1970द्धए ष्हीट ऐण्ड डस्टष् ;1982द्धए ष्पेरटी पॉलीष् ;1967द्धए ष्सिद्धार्थष्;1972द्धए और ष्सैमी ऐण्ड रोजी गेट लेडष् ;1987द्ध इन फिल्मों में शुमार हैं।

शशि कपूर की आखिरी फिल्में 1998 की ष्जिन्नाष्ए जिसमें इन्होंने एक वक्ता की भूमिका निभाई है और मर्चेंट आयवरी प्रोडक्शन्स की ष्साइट स्ट्रीट्सष् ;1988द्ध रहीं। इसके बाद वह फिल्मों से रिटायर हो गए। हाल में 55वें वार्षिक फिल्मफेयर अवार्ड्स में इन्हें ष्फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंटष् अवार्ड से सम्मानित किया गया। शशि कपूर को भारत सरकार ने ष्पद्म भूषणष् प्रदान किया। इससे पूर्व फिल्म ष्दीवारष् के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के लिए फिल्मफेयर अवार्डए रमेश शर्मा की ष्न्यू देल्ही टाइम्सष् के लिए सर्वश्रेष्ठ कलाकार के फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजे गए। इस्माईल मर्चेंट की ष्मुहाफिजष् में कवि की भूमिका के लिए भी फिल्मफेयर अवार्डों में नामित किए गए। शशि कपूर की रोमांटिक छवि भारतीय फिल्म इण्डस्ट्री में हमेशा याद की जाएगी। उनकी गंभीर कला और निर्देशन ने हिंदी फिल्मों को विभिन्न आयाम वाली कला और व्यवसायिक फिल्में दी जिनकी याद और योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 

कपूर खानदान की लंबी फिल्मी विरासत में शशि कपूर एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं और इससे इतर एक महान कलाकार जिनकी कला और आवाज हमेशा दर्शकों के दिलों में बसी रहेगी। थिएटर और पृथ्वी थिएटर से उनका गहरा लगाव रहा है। आज भी शशि कपूर हर रविवार पृथ्वी थिएटर में शो देखने जाते हैं।


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login



Related Items

  1. गुरु दत्त की विरासत संग पुणे में होगा विश्व सिनेमा का संगम

  1. सिनेमा के गौरवशाली अतीत को संजोने का काम है जारी

  1. सिनेमा के लिए राजकपूर का योगदान सदाबहार




Mediabharti