सिनेमा सृजन के योद्धा थे व्ही शांताराम

वी शांतारामवह भारतीय सिनेमा के उद्भव और विकास का समय था, जब व्ही शांताराम युवा विचारों, ऊर्जा और नए जोश की कहानियां लिए फिल्मों की ओर रुख करते हैं। ‘भक्त प्रह्लाद’, ‘सती सावित्री’, ‘खूनी खंजर’, ‘पड़ोसी’, ‘नवरंग’, ‘झांझर’, ‘डॉ . कोटनीश की अमर कहानी’ सरीखी अनेक फिल्मों में धार्मिकता और सामाजिकता के ही दर्शन नहीं होते... चुटीलापन, गंभीरता, हास्य-व्यंग्य, रस-रंग और कला के विभिन्न आयाम भी झलकते हैं। बहुरंगी छटाओं, छवियों और कहानियों वाली उनकी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को सदाबहार दृष्टियां दीं।

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