‘विकल्प को सपना नहीं बल्कि संभव बनाया जाए…’

नई दिल्ली : ‘नेहरू के बाद कौन…?’ की तरह पूछा जाने लगा था आपके बाद हंस का क्या होगा? कौन इसे देखेगा? चलेगा कि बंद हो जाएगा?  इस प्रकार के सवाल इधर बीच उनसे होने लगे थे।

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