सेवा में राजेश कुमार जिलाधिकारी, मथुरा महोदय, 'वर्ल्ड टॉयलेट डे' के अवसर पर ‘ब्रज बचाओ समिति’ के तत्वाधान में आयोजित एक बैठक में मथुरा जनपद में टॉयलेट संबंधी सुविधाओं - असुविधाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
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सेवा में राजेश कुमार जिलाधिकारी, मथुरा महोदय, 'वर्ल्ड टॉयलेट डे' के अवसर पर ‘ब्रज बचाओ समिति’ के तत्वाधान में आयोजित एक बैठक में मथुरा जनपद में टॉयलेट संबंधी सुविधाओं - असुविधाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
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दीपक एक युवक है जो कुल्लू में एक स्थानीय रेस्टोरेंट में बरतन धोने का काम करता है। उसकी आंखों की रोशनी चली गई है। आंखों की जांच के बाद उसे पता चला कि उसकी दृष्टि लौट सकती है, किन्तु इसमें हजारों रुपये लग सकते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की पहली सालगिरह ने देश को आकलन का एक मौका दिया है कि स्वतंत्रता से जरूरी स्वच्छता के मोर्चे पर वह 365 दिनों में कहां पहुंच पाया है। यहां यह बता देना जरूरी है कि 20वीं सदी की शुरुआत में जब गांधी के व्यक्तित्व का कायाकल्प हो रहा था, उन्हीं दिनों उन्होंने यह मशहूर विचार दिया था- स्वतंत्रता से भी कहीं ज्यादा जरूरी है स्वच्छता। गांधी के इस विचार की अपनी पृष्ठभूमि है। इस पर चर्चा से पहले प्रधानमंत्री के इस अहम अभियान की दिशा में बढ़े कदमों की मीमांसा कहीं ज्यादा जरूरी है।
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सेवा में राजेश कुमार जिलाधिकारी, मथुरा महोदय, ‘ब्रज बचाओ समिति’ निवेदन करती है कि आगामी त्योहारों के लंबे क्रम को देखते हुए यमुना नदी में प्लास्टिक और पीओपी की मूर्तियों के विसर्जन पर अविलंब रोक लगाई जाए तथा इसे रोकने में प्रशासन जो भी मदद कर सकता हो, की जाए।
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क्या आप किसी वैसे शहर की कल्पना कर सकते हैं जिसकी सड़कों पर स्थित हर खम्भे पर कैमरे लगे हों, रात में पैदल यात्री के उपस्थित होने पर बल्व स्वत: जल जाए अन्यथा डिम हो जाए, सूर्य की रोशनी के अनुरूप घरों की लाइट घटाई-बढ़ाई जा सकें और शिक्षक की गैर-हाजिरी पर किसी दूसरे स्कूल का शिक्षक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पढ़ा सके। जी हां, मोदी सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना इसी कल्पना को साकार करने में जुटी है।
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सेवा में जिलाधिकारी, मथुरा महोदय, बीते दिन कई मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित मथुरा की अनेक चांदी पॉलिश और प्लेटिंग कारखानों संबंधी एक रिपोर्ट को आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं। ये कारखाने बिना ट्रीटमेंट के रासायनिक अवशेषों को सीधे नालियों में बहा रहे हैं जो यमुना नदी में जाकर मिलते हैं। प्रदूषण विभाग इससे अनभिज्ञ दिख रहा है।
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