सीबीआई का छापा पड़ा तो बड़ा 'गुस्सा' आया...। एक 'अनुभवहीन' नेता की तरह जोर से गालियां 'फेंक' के मारी। जब शाम को अपनेआप को टीवी पर देखा तो समझ आया कि ये क्या कर डाला। आनन-फानन में सबको इकट्ठा करके मंथन किया कि एक 'घाघ' का मुकाबला इसी तरह से करें या कुछ 'सोच-विचारकर'...। दिमाग लगाया तो कुछ वास्तविक 'सवाल' उभरे जो पूछने थे... पूछ डाले...।
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