संपादकीय

पिछले कई दिन से उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े ‘राजनीतिक परिवार’ में सत्ता के लिए घोर घमासान चल रहा है। लगातार बैठकों पर बैठकें होने के बावजूद अब तक कोई हल नहीं निकला है। झगड़ा ‘यादव कुनबे’ का है इसलिए पार्टी का कोई भी सदस्य खुलकर नहीं बोल रहा है। जो बोल रहे हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। यहां तक कि सपा का ‘थिंक टैंक’ कहे जाने वाले और अखिलेश यादव का साथ दे रहे कुनबे के ही रामगोपाल यादव को भी छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

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अनुमान है कि देश के 18000 सुदूरवर्ती गांवों में विद्युत की सुविधा नहीं पहुंच पाई है। इस समस्या के समाधान का परंपरागत तरीक़ा केंद्रीयकृत वैद्युत ग्रिडों के माध्यम से इन गांवों को जोड़ना है। यद्यपि यह समाधान न केवल पूंजी प्रधान है और अधिक खर्चीला है, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी महंगा है क्योंकि इसके लिए विद्युत का संचरण पारंपरिक वैद्युत उत्पादन स्टेशनों से होता है। 

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साल 2050 तक विश्व की आबादी लगभग 9.5 अरब हो जाएगी। इसका स्पष्ट मतलब है कि हमें दो अरब अतिरिक्त लोगों के लिए 70 प्रतिशत ज्यादा खाना पैदा करना होगा। इसलिए, खाद्य और कृषि प्रणाली को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाना होगा और ज्यादा लचीला, उपजाऊ व टिकाऊ बनाने की जरूरत होगी। इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों का उचित इस्तेमाल करना होगा और खेती के बाद होने वाले नुकसान में कमी के साथ ही फसल की कटाई, भंडारण, पैकेजिंग और ढुलाई व विपणन की प्रक्रियाओं के साथ ही जरूरी बुनियादी ढांचा सुविधाओं में सुधार करना होगा। (Read in English)

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भारत की अध्यक्षता में 8वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन गोवा में इस महीने के मध्य में संपन्न होने के लिए निर्धारित है। ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूहीकरण का एक अद्वितीय अंतरराष्ट्रीय तंत्र है जो वैश्विक प्रभाव पुनर्संतुलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था और राजनीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं।

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स्वच्छता और शौचालय क्रांति की शुरुआत बेशक महात्मा गांधी जी ने की लेकिन यह दुर्भाग्य रहा कि लंबे अंतराल के बाद भी भारत में स्‍वच्‍छता की संस्‍कृति जन-जन तक पैठ नहीं बना सकी। इसलिए आज भी देश को पूरी तरह स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त नहीं किया जा सका है। 

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-महाराष्‍ट्र के वाशिम जिले के साईखेड़ा गांव की रहने वाली संगीता अहवाले ने अपने घर में शौचालय का निर्माण करवाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक बेच दिया।  -छत्‍तीसगढ़ जिले के धमतारी जिले में स्थित कोटाभारी गांव की 104 वर्ष आयु की वृद्धा कुंवर बाई ने अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए अपनी ब‍करियां बेच दीं।  -कोलारस ब्‍लॉक के गोपालपुरा गांव की आदिवासी नववधू प्रियंका अपनी ससुराल के घर में शौचालय न होने के कारण अपने माता-पिता के घर लौट आई।  -आंध्रप्रदेश के गुंटुर जिले की एक मुस्लिम महिला ने अपनी नई पुत्रवधू को एक शौचालय उपहार में दिया।  -स्‍कूल की छात्रा लावण्‍या तब तक भूख हड़ताल पर बैठी रही जब तक कर्नाटक स्थित उनके गांव हालनहल्‍ली के सभी 80 परिवारों में शौचालयों का निर्माण नहीं हो गया।  स्‍वच्‍छ भारत की दिशा में आए बदलाव के इस भारी परिवर्तन की ये कुछ झलकियां ही हैं...

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