संपादकीय

कहने को फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ आदि सोशल मीडिया हैं, लेकिन आपको यह ‘निजता’ का एक्सक्लूसिव अधिकार देता है। दूसरी ओर, पत्रकारिता के एक मंच की तरह अगर इसे देखें तो परिपेक्ष्य बदला नजर आता है।

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'सही' क्या है और 'गलत' क्या है... यह फैसला कौन करे... ? मेरे खयाल से 'सत्य' तो सार्वभौमिक है... जबकि 'सही' और 'गलत' की परिभाषा हम अपने हिसाब से गढ़ लेते हैं...।

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ऐसा पूर्वानुमान है कि वर्ष 2050 तक भारत चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राष्ट्र बन जाएगा। पहले से ही अधिक जनसंख्या का भार झेल रहे विश्व में, धनी देशों को भी गरीबी की वजह से बढ़ रही जनसंख्या विस्फोट की समस्या की जिम्मेदारी लेने के लिए कहा जा रहा है।

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एक सच्‍चे गांधीवादी नेल्‍सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति की सरकार से मानवाधिकार, स्‍वतंत्रता और अश्‍वेतों की भागीदारी हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके अपनाए। नेता के रूप में नेल्‍सन मंडेला की महात्‍मा गांधी, इटली के गरिबाल्‍डी और सोवियत संघ के लेनिन जैसे प्रखर सुधारवादियों से तुलना की जा सकती है।

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भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से घाटे में चल रही है। रेलवे को बचाने का एकमात्र तरीका है जब यात्री रेल में मिलने वाली सुविधाओं के लिए भाड़ा दें। अब तक मालभाड़े से हो रही आमदनी से यात्री सेवाओं को चलाया जा रहा था। लेकिन, हाल के वर्षों में मालभाड़े पर भी असर पड़ने लगा था।

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लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद हुई बहस का जवाब देते हुए दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण कई मायनों में अहम था। इस भाषण को सुनने के बाद ऐसा लगा कि देश की राजनीति में शायद 'अच्छे दिन' आने वाले है।

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इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना फिर से सामने आई है और यह घटना अति सभ्य होने का दंभ भरने वाले हमारे भारत देश की है। कहने को तो यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं से ऐसा लगता है कि इस देश में न तो नारी का मान-सम्मान है ही नहीं, अगर कुछ है तो सिर्फ और सिर्फ अपमान।

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ठीक 188 साल पहले पं. जुगल किशोर शुक्ल ने वर्ष 1826 में जब पहला हिन्दी अखबार ‘उदन्त मार्तण्ड’ निकाला तो हिंदी पत्रकारिता का मतलब सिर्फ ‘अखबार’ ही रहा होगा... ऐसा शायद किसी ने न सोचा होगा कि आने वाले युग में अखबार के अलावा दूसरे कई माध्यम संवाद संप्रेषण करने के लिए अपनी जगह बनाएंगे।

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आपके घर में अगर मेहमान आ गए तो अपके अंदर का 'वर्तमान विचारक' अपने आपको व्यवहार करते हुए देख पाएगा। 'देखा! मेहमान के सामने मैं कैसे व्यवहार कर रहा हूं।' वह वर्तमान विचारक हैं, वह सिर्फ मेहमान को ही नहीं देख रहा है बल्कि मेहमान को देखकर अपने अंदर क्या हो रहा है, वह भी देख रहा है। वह कहां सिकुड़ रहा है और कहां खुल रहा है, ये सभी बातें भी वह देख सकता है।

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हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में देश की जनता ने ऐसा जनमत दिया जिसकी उम्मीद बेहद कम ही लोगों को थी। यह चुनाव हर मायने में 'अलग' था।

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