संपादकीय

साल 1970 से आज तक देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार कई जनान्दोलन हुए और लड़ाइयां लड़ी गईं। आपने मीडिया का पूरा उपयोग करके देशभर में उम्मीद जगा दी है कि आप देश से भ्रष्टाचार को मिटा देंगे और विदेशों में जमा धन वापस ले आएंगे। इसके लिए हम आपको बधाई देते हैं।

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सन् 2013 मे योजना आयोग ने राष्ट्रव्यापी सम्पूर्ण सैनिटेशन अभियान का आकलन अध्ययन किया था। इस अध्ययन में 27 राज्यों के 11519 घरों का सर्वेक्षण किया गया था यानी यह एक विस्तृत सर्वेक्षण था।

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अरविन्द केजरीवाल एक उम्मीद और अदम्य जिजीविषा का नाम है। लोगों की आशा -आकांक्षाओं का प्रतीक स्वर है। आम जनता--किसान, मजदूर, छात्र, महिलाएं, नौजवान आदि (और खास भी, जो ईमानदार व्यवस्था चाहते हैं) ट्रेन, बस, चाय -पान की दुकानों, सड़क -बाजार, कॉलेज कैंपस, चौपालों, खेत -खलिहान पर जो मुद्दे उठाती है, आक्रोश प्रकट करती है... उन बहसों में, आक्रोश में 'अप्रिय सच' भी बोला जाता है। आक्रोश में अतिवादिता भी होती है। कई बार गलत -सलत दावे -प्रतिदावे भी होते हैं!

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देश सोलहवीं लोकसभा के आम चुनावों के लिए तैयार है। ‘फार्च्यून‘ पत्रिका के भारतीय संस्करण के वरिष्ठ संपादक हिन्डॉल सेनगुप्ता, जिन्हें वैश्विक विचार मंच ने उन 32 उद्यमियों पर एक पुस्तक प्रस्तुत की है, इसका शीर्षक है ”उन 100 चीजों को जानो तथा बहस करो, वोट करने से पहले।

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गत् बीते दिनो 23 मार्च को मैं संसद के सेंट्रल हॉल में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और समाजवादी आंदोलन के प्रमुख सेनानी डॉ राम मनोहर लोहिया को पुष्पांजलि अर्पित करने गया था। वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वह कम से कम 25 बार जेल गए थे।

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जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो उस समय मेरी विज्ञान की पुस्तक में "जल" नामक एक अध्याय था, जिसकी आरंभिक पंक्ति थी- पानी-पानी हर तरफ, लेकिन पीने को बूंद नहीं।

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