उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के दौर में आज हर आदमी स्कैनर के अंदर है। आप अपने लैपटॉप पर गूगल में अपना घर देख सकते हैं। इसने हमारी जिंदगी को और ज्यादा उलझा दिया है और हम इस बड़े बाजार में खो-से गए हैं।
Read More
उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के दौर में आज हर आदमी स्कैनर के अंदर है। आप अपने लैपटॉप पर गूगल में अपना घर देख सकते हैं। इसने हमारी जिंदगी को और ज्यादा उलझा दिया है और हम इस बड़े बाजार में खो-से गए हैं।
Read More
आप जितना कर सकते हैं, उससे ज्यादा करने की कोशिश न करें। अपनी गतिविधियों की छंटनी शुरू कर दीजिए और फिर अपनी कार्य-सूची पर पुनर्विचार कीजिए। जो चीजें बेकार एवं महत्वहीन हैं, उन्हें बाहर कर दीजिए।
Read More
जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है, सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं उस समय यह बोध कथा "कांच की बरनी और दो कप चाय" हमें याद आती है।
Read More
मैं एक मरती हुई भाषा बोलती हूं (थी!)। मार दी गई भाषा! तुमने कहा था कि तुम कोई भाषा जानते हो जो हमें हमारे गंवारूपन और उज्जड़ता से उबार ले जाएगी। और हम तो तमाम दूरियां लांघ आए जहां तक हमें विकास की दौड़ में पीछे धकेलती हमारी भाषा सुनी या बोली जा सकती थी।
Read More
नई दिल्ली : बाबा रामदेवसाल 1970 से आज तक देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार कई जनान्दोलन हुए और लड़ाइयां लड़ी गईं। आपने मीडिया का पूरा उपयोग करके देशभर में उम्मीद जगा दी है कि आप देश से भ्रष्टाचार को मिटा देंगे और विदेशों में जमा धन वापस ले आएंगे। इसके लिए हम आपको बधाई देते हैं।
Read More
नई दिल्ली : थामस अल्वा एडिसन ने बल्ब का आविष्कार करने से पहले लगभग 300 प्रयोग किए थे, तब कहीं जाकर उनका प्रयोग सफल हुआ था। उनकी इस असफलता पर एक युवा रिपोर्टर ने उनसे पूछा, "आपको इतनी बार नाकामी झेलने के बाद कैसा लग रहा है?" जवाब में एडिसन ने कहा, ''मैं कभी नाकाम नहीं हुआ। मैंने प्रकाश बल्ब का आविष्कार किया है और उसके आविष्कार की प्रक्रिया 2000 चरणों में संपन्न हुई है।''
Read More