बुलदंशहर । उत्तर प्रदेश बुलंदशहर में मां और बेटी के साथ हुए गैंगरेप के मामले में जहां पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वहीं इस घटना में पुलिस की बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि पुलिस अगर पूर्व की घटनाओं पर चेत जाता, तो वह नहीं होता जो शुक्रवार रात हुआ। हालांकि अब पुलिस ने वादा किया है कि सोमवार को सभी आरोपियों की गिरफ्तार हो जाएगी। उधर रेप पीडि़ता नाबालिग लडक़ी के पिता ने चेतावनी दी है कि अगर दोषयिों को तीन महीने के अंदर सजा नहीं दिलाई गई तो उनका पूरा परिवार आत्महत्या कर लेगा।
5 पुलिस अफसर सस्पेंड
पिता ने कहा कि पुलिस ने हमें तीन महीने की डेडलाइन दी है। यह वारदात खराब लॉ एंड ऑर्डर के चलते ही हुई है। अगर हमें न्याय नहीं मिला तो हम जहर खा लेंगे। उन्होंने कहा कि हम उन बदमाशों की आंखें निकाल लेंगे। इससे पहले इस मामले में लापरवाही करने वाले एसएसपी, सिटी एसपी और सीओ समेत पुलिस के पांच अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया।
ऐसे हुई पुलिस कोताही
दरअसल कोतवाली देहात इलाके में पहले भी एक्सल फेंककर लूटपाट की दो वारदातें हुई थीं, लेकिन तब पुलिस ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। सख्त कार्रवाई तो दूर, लूट की वारदात छिनौती व चोरी की धाराएं लगाकर निपटा दी गईं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, धाराओं के इस खेल में तत्कालीन एसएसपी बुलंदशहर की अहम भूमिका थी। डीजीपी मुख्यालयको इन घटनाओं की जानकारी मिली है।सात और 12 मई को कोतवाली देहात क्षेत्र में हुई वारदात का भी वही तरीका था, जो शुक्रवार रात हुई वारदात में था। एक्सल गैंग ने रास्ते में एक्सल फेंककर गाडियां रुकवाईं और लूटपाट की। जब कोतवाली देहात पुलिस और जिले के कप्तान तक खबर पहुंची तो पुलिस उन्हें दबाने में जुट गई।
12 मई वाली वारदात को देहात पुलिस ने चोरी की धारा (379) व सात मई की वारदात को छिनैती (आईपीसी की धारा 356) में दर्ज किया। अगर ये दोनों वारदातें सही धाराओं में दर्ज कर लटेरों की तलाश की गई होती, तो शायद वे सलाखें के पीछे होते। उस वक्त आईपीएस पीयूष श्रीवास्तव बुलंदशहर के एसएसपी थे। वैभव कृष्ण ने 18 मई को जिले की कमान संभाली थी। शुक्रवार को हुई वारदात के बाद उनकी जानकारी में ये दोनों मामले सामने आए।
...तो अफसरों ने की लापरवाही
सूत्रों के मुताबिक, जब हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बारे में संबंधित अफसरों से पूछा गया, तो उन्होंने बताया, ऐसे तत्कालीन एसएसपी और अन्य अधिकारियों के कहने पर किया गया। अभ डह्वीजीपी मुख्यालय ने इन तथ्यों की पड़ताल करा रहा है।
क्या है पूरा मामला ?
यह वारदात शुक्रवार रात की है। पीडि़त परिवार दो बड़े भाई शनिवार रात को मां की तेहरवीं करने घर जा रहे थे। एसेंट कार में दोनों भाई, दोनों की पत्नियां और बड़े भाई का बेटा और और छोटे भाई की 13 साल की बेटी थी। दर्जनभर हथियारबंद बदमाशों ने गाड़ी पर लोहे की भारी चीज फेंककर भ्रम फैलाया कि गाड़ी में कोई खराबी आ गई है। जब गाडी रुकी, तो बदमाशों ने पहले तो लूटपाट की और बाद में गाड़ी में मौजूद मां और उसकी 13 साल की बेटी को हाइवे से खींचकर खेतों में ले गए और उनका गैंगरेप किया। हैरानी की बात यह है कि घटनास्थल से पुलिस चौकी कुछ ही दूरी पर थी। जिस गैंग ने इस वारदात को अंजाम दिया, उसमें अलीगढ़, बुलंदशहर, मेरठ, पलवल और फरीदाबाद तक के घुमंतू अपराधी शामिल बताए जा रहे हैं। ये घुमंतू बावरिया, छेमार और अहेडि़øा जाति से जुड़े हुए हैं। एक आरोपी सलीम को लोकेश मेरठ में मिली है।
एडीजी ने कहा- घटना शर्मनाक
यूपी पुलिस के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दलजीत चौधरी ने मामले को बेहद शर्मनाक बताया। उन्होंने डीजीपी के साथ बुलंदशहर जाकर हालात का जायजा लिया। डीजीपी ने बताया कि आरोपियों को पकडऩे के लिए पुलिस की कई टीमें बनाई गई हैं। इसमें एसटीएफ को भी लगाया गया है। चौधरी ने बताया, ‘ये लोग एक खास तरह से घटना को अंजाम देते हैं। वे सडक़ पर चलती गाड़ी के नीचे कोई लोहे की चीज फेंकते हैं, जिससे ऐसा लगता है मानो गाड़ी से कोई चीज गिरी हो। उसके बाद जब गाड़ी सवार उतरता है, तो ये लोग लूटपाट को अंजाम दे देते हैं। इस बार इन लोगों ने लूटपाट के साथ रेप भी किया।
रेप आशंका, पर प्राइवेट पर चोट नहीं
इधर, पीडि़ता की मां की मेडिकल रिपोर्ट में रेप की आशंकी की बात आई है। लेकिन दोनों के ही प्राइवेट पार्ट पर चोट नहीं है। मां की उम्र 32 वर्ष और बेटी की उम्र 14 वर्ष बताई जा रही है। दोनों के स्लाइड टेस्ट रिपोर्ट का इंतषार किया जा रहा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के डीएनए और अन्य नमूने लेकर उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
वहीं, इस वारदात के बाद से डीजीपी तक की कुर्सी खतरे में है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का सख्त निर्देश था कि खुलासा न होने की स्थिति में शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। सीएम का सख्त रुख देखते हुए एडह्वीजी (कानून-व्यवस्था) दलजीत सिंह चौधरी को बुलंदशहर भेजने का फैसला हुआ, लेकिन उन्हें बीच रास्ते से वापस बुलाकर डीजीपी व प्रमुख सचिव गृह बुलंदशहर पहुंच गए। उन्होंने घटनास्थल की दौरा किया और पीडि़त परिवार से बातचीत की। बुलंदशहर की डीएम आंजनीय सिंह ने बताया कि रेडक्रॉस सोसाइटी की तरफ से गैंगरेप पीडि़ताओं को इलाज के लिए 50-50 हजार रुपये दिए गए हैं।
इन पुलिस अफसरों पर हुई कार्रवाई, राभवन की भी नजर
राज्य सरकार ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए एसएसपी, एसपी, सीओ, दो इंस्पेक्टरों, बीट दरोगा और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। एसएसपी (बुलंदशहर) वैभव कृष्ण, एसपी सिटी राममोहन सिंह, सिओ हिमांशु गौरव को सस्पेंड किया गया है। गैंगरेप की इस घटना के मामले पर राजभवन की भी नजर बनी हुई है। हालांकि इस मामले पर राज्यपाल ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल के निर्देश पर पूरे घटनाक्रम और उस पर सरकार की कार्रवाई का ब्योरा जुटाया जा रहा है।
साभार-khaskhabar.com
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