मथुरा

मथुरा । राया रोड स्थित सैय्यद के पास संचालित एक नर्सिंग होम में चल रहे भ्रूण जांच केन्द्र का अलवर पुलिस ने मथुरा प्रशासन के सहयोग से छापा मार कर खुलासा किया है। नर्सिंग होम का संचालक डाक्टर मौके से भाग गया जबकि एक नर्स व एक दलाल महिला को अलवर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। डा. की टेबिल की दराज से 315 वोर का तमंचा व कारतूस भी इस छापा मार कार्यवाही में बरामद हुए हैं। अलवर पुलिस की इस कार्यवाही से जिले के ऐसे नर्सिंग होम संचालकों में हडकम्प मच गयी है जो उच्चतम न्यायालय के सख्त निर्देंषों के वाद भी चोरी छिपे भ्रूण जांच करा रहे हैं। अलवर राजस्थान के अपर पुलिस अधीक्षक रघुवीर सिंह ने आज बुधवार सुबह जिलाधिकारी निखिल चन्द षुक्ला से सम्पर्क कर जमुनापार थाना क्षेत्र में राया रोड पर संचालित अमर हास्पीटल में भ्रूण जांच केन्द्र पर छापा मारने की सहमति मांगी। डीएम श्री षुक्ला ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए नगर मजिस्ट्रेट रामअरज यादव को अलवर पुलिस के सहयोग के निर्देष दिये। नगर मजिस्ट्रेट रामअरज यादव, अलवर अपर पुलिस अधीक्षक रघुवीर सिंह ने मथुरा और अलवर की संयुक्त टीम के साथ अमर हास्पीटल पर छापा मारा तो अफरातफरी मच गयी मौके से अस्पताल का संचालक डा. डी. के. ठेनुआ भागने में सफल रहा जबकि हास्पीटल की नर्स स्नेहलता और दलाल सीमा चैधरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अलवर के अपर पुलिस अधीक्षक रघुवीर सिंह ने बताया कि पिछले छह माह से एक एनजीओ द्वारा अलवर की रहने वाली सीमा चैधरी नामक महिला द्वारा अलवर, डीग, भरतपुर और आसपास की महिलाओं को मथुरा भ्रूण जांच हेतु ले जाने की षिकायतें की जा रही थीं। वीतीरात सीमा चैधरी द्वारा तीन महिलाओं को मथुरा बुलेरोे गाडी से लाये जाने की सूचना मिली थी जिसके आधार पर एएसपी श्री सिंह ने अलवर व मथुरा पुलिस के साथ गोवर्धन चैराहे पर आज सुबह बुलेरो गाडी की निगरानी की। बुलेरो कृष्णा नगर, टेंक चैराहा, कृष्णापुरी तिराहे होती हुई राया रोड स्थित अमर हास्पीटल पहुंची और इसमें सवार एक महिला के भ्रूण की जांच हो भी चुकी थी इसी दौरान यह छापा मार कार्यवाही हुई। अलवर के एएसपी ने बताया कि दलाल सीमा भ्रूण जांच के लिये प्रत्येक महिला से छह हजार रुपये लेती थी और इन तीनों महिलाओं के पांच हजार रुपये हास्पीटल संचालक डा0 ठेनुआ को देने थे। अलवर पुलिस पकडी गयी नर्स और दलाल को अपने साथ ले गयी है जबकि डाक्टर की दराज से मिले तमंचे कारतूस जमुनापार पुलिस के सुपुर्द किये गये है।

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मथुरा । इज्जत की रोटी चटनी से खाना पसन्द करने वाले माता पिता तीन रोज पूर्व इकलौते बेटे को तरूण को स्मैक में जेल भेजे जाने से इतना टूट चुके हैं कि वे कभी भी अपना परिवार नष्ट करने को तैयार हैं। डीएम, एसएसपी कार्यालय और आवासों पर चक्कर काटते काटते दो रोज से माता पिता वेहद व्यथित हैं।  विदित रहे कि हाईवे पुलिस ने सोमवार की रात राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित जयगुरूदेव मंदिर के सामने से तरूण चैधरी पुत्र रणधीर सिंह निवासी अवैरनी थाना बलदेव को रवि चैधरी पुत्र राजवीर सिंह निवासी मकान नम्बर दो गोकुलपुरम काॅलोनी थाना सदर बाजार के साथ सौ ग्राम स्मैक, दो किलो डायजापाम, एक इलैक्ट्रोनिक कांटा, आल्टो कार दो मौबाइल फोन और छह सौ सत्तर रुपये नकदी बरामद कर जेल भेजा है। नवागत एसएसपी बबलू कुमार के आने के वाद से धडाधड गुडवर्कों का दावा करने वाली पुलिस की कहानी की सच्चाई तरूण के पिता रणधीर सिंह से सुनें तो पुलिस किस तरह से निर्दोश को अपराधी बनाती है उसका सीधा खुलासा सामने आता है। तरूण के पिता रणधीर सिंह जो पेषे से प्राईवेट डाइबर हैं और अवेरनी के रहने वाले हैं। इनका इकलौता बेटा तरूण लगभग 23 वर्ष का है और उसने बीए तक की शिक्षा ग्रहण की है। नौकरी के लिये इधर से उधर चक्कर काट रहा था हाल में जीएलए यूनीर्वसिटी में टेस्ट देकर चुका था और नौकरी न मिलने तक अपने परिचित मुकेश तोमर के भांजे की मण्डी चैराहा स्थित रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर जेब खर्च निकालने आया करता था। 31 जुलाई रविवार को तरूण सुबह वैराज मौड पर मण्डी चैराहे जाने को वाहन की प्रतीक्षा में था तभी उसे आल्टो में सवार रवि चैधरी मिला। बूढे पिता तरूण की माने तो रवि चैधरी की ननिहाल उनके अवेरनी घरके बरावर है जिससे वह एक दूसरे को जानते हैं। रवि के कहने पर तरूण मण्डी जाने को उसकी आॅल्टो में बैठ गया बस यही उसका सबसे बडा अपराध है। तरूण की मां और पिता ने रोते हुए कहा कि उनके पास इकलौते बेटे को हाई कोर्ट से छुडाने के लिये एक बीधा जमीन भी नहीं है। ऐसे में उनके पास पूरे परिवार को नष्ट करने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं बचा है। फिलहाल बूढे माता पिता डीएम एसएसपी से न्याय की वाट जोह रहे हैं यदि आलाधिकारी वास्तविकता का पता लगा इस परिवार को न्याय दिला पाते हैं तो आज भी सच्चाई की जीत का दावा सार्थक हो सकता है।  

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मथुरा । नयति मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल मथुरा ने आज विस्तृत ऑर्थोपेडिक हेल्थ चेकअप की शुरुआत करने की घोषणा की। जिसके अंतर्गत भविष्य में हड्डी और जोड़ों की समस्या तथा उनके निवारण की विस्तृत सेवा का प्रावधान किया गया है। इस पैकेज के अंतर्गत भविष्य में हड्डी से जुड़ी समस्या से बचाव, सम्पूर्ण परिवार के हड्डी की देखभाल, जोड़ों की समस्याओं का इतिहास, सूजन,जोड़ों के दर्द जैसी सभी तरह की समस्या की सम्पूर्ण जानकारी और इलाज की व्यवस्था की गयी है। विस्तृत हेल्थ चेकअप पैकेज बहुत ही कम दाम पर यानि की सिर्फ 1450- में कराया गया है ताकि इस लाभकारी पैकेज का लाभ सभी ब्रजवासी ले सकें। ऑफर सीमित समय के लिए उपलब्ध है जिसकी अवधि है- 4 अगस्त से 14 अगस्त तक। नयति हॉस्पिटल की चैयरपरसन नीरा राडिया जी ने पैकेज के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इलाज से बेहतर है निवारण। अपनी बात को समझाते हुए कहा कि जब बात स्वास्थ्य की होती है तो लोग रुटीन चेकअप जैसे महत्त्वपूर्ण  बात को नजर अंदाज कर जाते हैं जबकि हमें रुटीन चेकअप से होने वाले फायदे को गंभीरता से लेना होगा। हमें ये समझना होगा कि सही टीकाकरण, दवाईयां और समय समय पर चेकअप से ही हमारा स्वास्थ्य बेहतर से बेहतर होगा। हड्डी से जुड़ी समस्या एक गंभीर रूप लेती जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ भारत में ही 180 मिलियन के ऊपर इस समस्या से जुड़े लोग हैं जोकि कैंसर, मधुमेह और एड्स जैसी समस्या से कहीं ज्यादाहैं। आजकल बच्चों और किशोरों में ये समस्या आम बनती जा रही है जोकि एक गंभीर समस्या है। अतः हमें ये समझना होगा कि इस समस्या से बचने के लिए हमें समय रहते समस्या से निदान का उपाय कर लेना चाहिए। अगर समय रहते हम बीमारी के बारे में जान लें तो उससे होने वाले गंभीर परिणाम से बच सकते हैं। हमने पाया है कि सही जानकारी न होने के कारण लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझ पाते जिसके कारण समस्या काफी गंभीर रूप ले लेती है और काफी तकलीफ उठानी पड़ती है। अतः हमारा मकसद है कि हम इस समस्या का निवारण करें और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर बना सकें। आशा करेंगे किज्यादा से ज्यादा लोग इस पैकेज का लाभ उठायें और अपना स्वास्थ्य बेहतर बनायें।”

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मथुरा । जब कभी सावन-भादों का महीना शुरू होने को होता है तो यहां हर ब्रजवासी के मन में घेवर की सुगन्ध का एहसास जगने लगता  है। ब्रज में बन रहे घेवर का चलन यूं तो काफी पुराना है, उस पर ब्रजवासी का घेवर भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है और  इसकी भारी मांग यहां आने लगती है।  ब्रज क्षेत्र में हर तरफ खाने-पीने की दुकानें आपको दिख जाएंगी। इनमें कचौड़ी, जलेबी, चाट-पकौडी और दूसरी मिठाइयां आपको मिल  जाएंगी। यहां की खास बात यह भी है कि सीजन के हिसाब से मिठाइयां बनती हैं। गजक, रेबड़ी, इमरती, घेवर, फैनी आदि। गजक, रेबड़ी  सर्दियों में, इमरती केवल पितृपक्ष यानी सितम्बर अक्टूबर में तैयार होती हैं। घेवर फैनी सावन के महीने में बनाई जाती है। लेकिन, सावन के महीने में बाजारों में तैयार होने वाली विशेष मिठाई घेवर की महक की बात ही कुछ और है। इन दिनों शहर की हर मिठाई की दुकान पर घेवर मिल जाएगा। घेवर की बिक्री हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक होती है इसके लिए दुकानदार महीनों से सूखा घेवर बनाकर रखने लगे हैं। सीजन शुरू होते ही इनको गरम करके इसपर मलाई, खीज, खोआ, मेवा आदि लगाकर दुकानों पर सजा लेते हैं। घेवर का वैसे तो कोई इतिहास नहीं हैं कि इसको किसने तैयार किया तथा कब और क्यों तैयार किया लेकिन घेवर मुख्य रूप से राजस्थान में ज्यादा तैयार किया जाता है। जयपुर में घेवर को विभिन्न तरीकों से तैयारकर व सजाया जाता है। घेवर को एक गोल कढ़ाई में रिंगनुमा  सांचों में खमीर उठा हुआ मैदा पतली धार के साथ गरम घी में डाला जाता है। गरम घी में मैदा एक रूप ले लेता है जिसको निकालकर पहले तो इसपर चीनी की चासनी चढ़ाई जाती थी, लेकिन अब इस मिठाई का भी रूप समय के अनुसार बदल गया है। अब घेवर मलाई, खीज, खोआ, मेवा से तैयार किया जाता है जबकि फैनी भी मैदा से ही बनती है जिसको खीच खींचकर रेशों में तैयार किया जाता है मीठी फैनी व सादा फैनी बनती है। कुछ लोग मीठी फैनी खाते हैं तो कुछ दूध में फीकी फैनी डालकर ऊपर से मीठा डालकर खाते हैं। मैदा से निर्मित घेवर एक ऐसी मिठाई है, जिसको खाने का मन हर किसी को करता है। पहले यह घेवर अधिक चासनी में बनती थी जो गांव के लोग खूब मजे से खाते थे। अब हर कोई अपने स्वास्थ्य को लेकर चिन्तित रहता है जिसके कारण अब वह चीनी वाला घेवर बाजार में दिखाई नहीं देता है साथ ही अब उसके खरीदार भी नही हैं। सब मलाई वाला घेवर ही लेना पसन्द करते हैं। इसका सावन के महीने में विशेष महत्व है। सावन के महीने के बाद इस घेवर के मिठाई की दुकानों पर दर्शन भी नहीं होते हैं। इस महीने में पड़ने वाले त्यौहार हरियाली तीज, रक्षाबंधन पर इस मिठाई का ही चलन है। हरियाली तीज पर पति अपनी पत्नियों के लिए घेवर खरीदकर ले जाते हैं। नवविवाहित युवक ससुराल जाते हैं तो वह घेवर लेकर जाते हैं। इसके बाद रक्षाबंधन पर बहन अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधने के बाद घेवर से ही उनका मुंह मीठा कराती हैं। इस सब के चलते घेवर की जमकर डिमांड रहती है। घेवर की सीजनल दुकानें भी इस समय सज जाती हैं। दुकानदार भी घेवर का स्टाक करना शुरू कर देते हैं। घेवर की मिठाई मैदा से तैयार होता है। इसे विशेष प्रकार की कढ़ाई में रिफाइंड या घी में पकाया जाता है। इसके बाद इस  पर चाशनी चढ़ाई जाती है और फिर विभिन्न प्रकार के फ्लेवर से सजा दिया जाता है। दुकानदार सावन भादों के महीने में बनने वाली मिठाई घेवर के लिए काफी व्यस्त हो जाते हैं। हरियाली तीज और रक्षाबंधन तक दुकानदारों के सारे गोदाम खाली हो जाते हैं। शहर में प्रमुख मिठाई विक्रेताओं के अलावा चौक बाजार, होली गेट, मण्डी रामदास, शहर के हर गली मोहल्ले में स्पेशल दुकानें सज जाती हैं। पिछले वर्ष के मुकावले घेवर के दामों में इजाफा हुआ है। घेवर के रेट पिछली साल की अपेक्षा इस बार ज्यादा बढ़े हैं। रिफाइंड से तैयार घेवर दो सौ अस्सी रुपये प्रति किलो है तो देशी घी से तैयार घेवर 380-400 रुपये प्रतिकिलो तक है। पूरे सावन और भादों के महीने में ही घेवर बिकता है, अब शगुन के लिए लोग घेवर खरीदते हैं जिसके कारण अब सावन में भी इतनी बिक्री नहीं हो रही है। उम्मीद है कि हरियाली तीज के बाद रक्षाबंधन इसकी पूर्ति कर देंगे। सावन में हर साल दुकानदार अपनी दुकान के सामने स्पेशल दुकान भी लगाते हैं और ठेके पर और दुकानदारों का घेवर भी तैयार करते हैं। ठेके पर काम करने वाले महीनों पहले से सूखे घेवर का स्टाक करते हैं और सीजन में इनकी बिक्री दुकानों पर होती है। रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही शहर घेवर की सुगंध से महक उठता है। शहर में जगह-जगह देशी घी और वनस्पति घी से निर्मित घेवर तैयार किए जाते है। मिष्ठान विक्रेता कारीगरों से दिन और रात की शिफ्ट में घेवर तैयार कराते हैं। घेवर को तैयारकर स्टॉक भी किया जा रहा है। मैदा, देशी घी, वनस्पति घी और खोवा व ठेके पर काम करने वाले कारीगरों के दामों में वृद्धि होने से इस बार घेवर के भी दाम बढ़े हैं। रक्षाबंधन पर्व के लिए दूर दराज में रहने वाले रिश्तेदारों और परिजनों को घेवर पैकिंग कराकर भेजा जा रहा है। रक्षाबंधन पर्व पर दुकानदारों को भी अच्छी दुकानदारी होने की उम्मीदें हैं। शहर की प्रमुख दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ घेवर खरीदने में जुटी हुई है। मिठाई के छोटे-बड़े सभी दुकानदार इन दिनों घेवर बनाने और बेचने में लगे हुए हैं। घेवर के सामने ग्राहक भी दूसरी मिठाइयों को नहीं पकड़ रहा है। ग्राहकों की आपूर्ति करने के लिए दुकानदारों ने घेवर बनाने के अधिक से अधिक कारीगर लगाए हैं। अधिकतर दुकानों पर दो तरह का घेवर तैयार किया जा रहा है जिसमें एक रबड़ी वाला तो दूसरा सादा घेवर। रबड़ी वाले घेवर को दुकानदार 'ताजा ले जाओ और ताजा खाओ' करके बेच रहे हैं। उनका मानना है कि गर्मी अधिक होने के कारण रबड़ी का घेवर खराब होने की आशंका ज्यादा रहती है जबकि सादा घेवर एक सप्ताह तक खराब नहीं होगा। हालांकि, कुछ दुकानदार पैसा कमाने  के लिए खराब क्वालिटी का घेवर भी मार्केट में बेच रहे हैं।  ब्रजवासी प्रतिष्ठान के सतीश ब्रजवासी ने बताया कि हरियाली तीज पर घेवर की भारी मांग होती है इसलिए सावन के महीने में दिन-रात काम चलता है और 100 से ऊपर कारीगर लगते हैं। 30 से 35 भट्टियां लगी हुई हैं। इस दौरान यहां देश के हर कोने से श्रद्धालु आते हैं। सावन के महीने के दो बड़े त्यौहार रक्षा बंधन और कृष्ण जन्माष्टमी के चलते इसकी मांग बहुत है। होलीगेट स्थित शंकर मिठाई प्रतिष्ठान के बनवारी लाल खण्डेलवाल ने बताया कि ये मिष्ठान सावन के महीने में भरपूर बिकता है। इसका सावन के महीने में बड़ा महत्व है। वही, धोली प्याऊ स्थित यादव मिठाई वाले ने बताया कि इन दिनों और मिठाईयों की अपेक्षा घेवर ही  ज्यादा बिकता है। 

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निर्माता-निर्देशक राकेश ओमप्रकाश बॉलीवुड के ‘झकास’ मैन के पूरे परिवार से जबरदस्त प्रभावित हैं। उन्होंने इस परिवार की पुत्री सोनम कपूर के साथ ‘दिल्ली-6’ और ‘भाग मिल्खा भाग’ में काम किया।  मेहरा इन दिनों अनिल कपूर के पुत्र हर्षवर्धन कपूर को लेकर ‘मिर्जिया’ बना रहे है। इस फिल्म से हर्षवद्र्धन बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं। फिल्मकार राकेश ओम प्रकाश मेहरा अब अनिल कपूर को लेकर फिल्म बनाने जा रहे हैं जिसका टाइटल है ‘फन्ने खां‘’। इस फिल्म में अनिल कपूर टाइटल रोल निभा रहे हैं। अनिल कपूर ने कहा कि उनका किरदार मुंबई के भिंडी बाजार इलाके में रहता है। ये बहुत रंगीन किरदार है, जिसका एक खास तरह का लुक होगा। फिलहाल किरदार के पहनावे और बोलचाल के तरीके पर काम चल रहा है। अनिल कपूर ने कहा कि ये उनके करियर का अब तक का सबसे दिलचस्प रोल होगा।                          साभार-khaskhabar.com  

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रियो डी जेनेरियो । आकाशदीप और रूपिंदर पाल सिंह के शानदार दो गोल की बदौलत भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने रियो ओलम्पिक-2016 से पहले खेले गए अभ्यास मैच में स्पेन को 2-1 से हरा दिया। रियो आने से पहले मेड्रिड में खेले गए दो अभ्यास मैचों में स्पेन ने भारतीय टीम को मात दी थी। रविवार को हुए इस अभ्यास मैच में भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया। जीत के बाद टीम के कप्तान पी.आर.श्रीजेश ने कहा कि स्पेन में काफी गर्मी थी। हम वहां बेंगलुरू से पहुंचे थे जहां मौसम काफी अच्छा था। मेड्रिड में तापमान 40 डिग्री था। उन्होंने कहा कि रियो में स्पेन के खिलाफ खेलना अच्छा रहा। हम अच्छा खेले। एक-दो अभ्यास सत्र के बाद एक अभ्यास मैच और खेला जाएगा। भारत ने 1980 के बाद से ओलम्पिक में पदक नहीं जीता है। उसकी कोशिश इस बार इतने सालों से चले आ रहे सूखे को खत्म करने की होगी। भारत ने 1928 से लगातार आठ स्वर्ण पदक हासिल किए थे। वहीं, 1960 ओलम्पिक में उसे रजत और 1968 एवं 1972 में उसे कांस्य पदक मिला था। भारत छह अगस्त को आयरलैंड के खिलाफ ओलम्पिक में अपने अभियान की शुरुआत करेगा।   सानिया और टेबल टेनिस टीम पहुंची रियो स्टार टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा और टेबल टेनिस टीम सोमवार को रियो ओलंपिक के खेल गांव पहुंच गई। सानिया ओलंपिक खेल गांव पहुंचने वाली पहली टेनिस खिलाड़ी हैं। अपने तीसरे ओलंपिक में खेल रहीं सानिया मांट्रियल से यहां पहुंची हैं, जहां वे रोजर्स कप में हिस्सा ले रही थीं। सानिया महिला युगल में प्रार्थना थोंबारे के साथ जोड़ी बनाएंगी जबकि मिश्रित युगल में रोहन बोपन्ना के साथ खेलेंगी। महिला युगल मुकाबलों की शुरुआत छह जबकि मिश्रित युगल मुकाबलों की शुरुआत 10 अगस्त से होगी। रविवार को भारत की टेबल टेनिस टीम भी खेल गांव पहुंची जिसमें शरत कमल, सौम्यजीत घोष, मौमा दास और मनिका बत्रा शामिल हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता शरत कमल अपने तीसरे जबकि सौम्यजीत दूसरे ओलिंपिक में खेल रहे हैं। मौमा दास 2004 एथेंस ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी हैं जबकि मनिका पहली बार ओलिंपिक में शिरकत कर रही हैं।                          साभार-khaskhabar.com  

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