मथुरा

इलाज के एवज में परिजनों से तीस हजार हड़पे मथुरा।  थाना महावन अन्र्तगत गांव कारव में एक डाक्टर ने एक ग्रामीण को खराब खून चढा दिया जिससे उसकी मौत हो गई। डाक्टर ने पीड़ित परिवार से तीस हजार रूपये भी ले लिये। अब मृतक के भाई ने डाक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार कारव गाॅव निवासी महावीर सिंह का गांव के ही डाक्टर अशोक कुमार ने इलाज किया था। इलाज के दौरान उसने महावीर को खराब खून चढ़ा दिया। जिससे उसकी मृत्यु हो गई। डाक्टर ने महावीर के परिजनों से इलाज के ऐवज में तीस हजार रूपये भी ले लिये।

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नई दिल्ली । भाजपा को अपने बयानों से असहज करने वाले राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खरी खरी क्या सुनाई, इस दिग्गज नेता ने एक ही दिन गीता के उपदेशों की शरण ले ली। सोमवार को प्रधानमंत्री ने सुब्रह्मण्यम स्वामी के तौर तरीकों को इशारों में ही ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करार दिया। हालांकि मोदी ने स्वामी का नाम नहीं लिया, लेकिन मंगलवार सुबह ही स्वामी का ट्वीट काफी कुछ कह रहा था।   स्वामी ने मंगलवार सुबह-सुबह ट्विटर पर श्रीकृष्ण के उपदेश को याद करते हुए ‘सुख दुखे...’ श्लोक का जिक्र किया है। स्वामी ने ट्विटर पर कहा, ‘दुनिया अपने सामान्य संतुलन की अवस्था में रहती है। किसी एक सिरे पर किए गए छेड़छाड़ का असर सभी तरफ होता है। ऐसी सलाह कृष्ण ने दी है: सुख दुखे...।’ दरअसल गीता उपदेश में श्रीकृष्ण ने कहा है, ‘सुख दुखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ, ततो युद्धाये युज्यस्व नैवं पापस्वाप्स्यासी।’ इसका मतलब हुआ, सुख दु:ख, लाभ नुकसान, जीत हार में अपने का सम रखकर युद्ध करो। इस तरह तुम पाप से बच सकते हो। इस बीच, मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात भी होनी है। सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि वित्त मंत्री जेटली इन दिनों सुब्रह्मण्यम स्वामी के जुबानी प्रहार की वजह से नाराज हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जेटली के एक विश्वस्त सहयोगी का कहना है कि स्वामी के ट्विटर पर किएगए हमलों को व्यक्तिगत राय कहकर नहीं छोड़ा जा सकता, स्वामी पार्टी के सदस्य हैं।   बता दें कि भाजपा के राज्यसभा सांसद ने लगातार पार्टी लाइन से इतर बयानबाजी कर वित्तमंत्री पर सार्वजनिक हमले किए और बाद में उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास और आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन पर भी विवादित बयान दे चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा में स्वामी ने मौजूदा सरकार में उनकी प्रभावशाली स्थिति को समझे बिना ही हमला कर दिया है। स्वामी की पार्टी के इतर बयानबाजी के बाद प्रधानमंत्री ने सोमवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि किसी को भी पार्टी लाइन नहीं तोडऩी चाहिए। अगर कोई पब्लिसिटी के लिए बयान दे रहा है तो यह गलत है। कोई भी पार्टी से बड़ा नहीं हो सकता। यही नहीं, आरबीआई चीफ का पक्ष लेते हुए पीएम ने रघुराम राजन को देशभक्त भी बताया। स्वामी ने जेटली पर परोक्ष रूप से कई बार हमला बोला है। स्वामी ने कुछ दिन पहले कहा था कि विदेश दौरे पर मंत्रियों को टाई सूट नहीं पहनना चाहिए। कोट और टाई में वे वेटर लगते हैं। इस दौरान वित्त मंत्री जेटली ही विदेश दौरे पर थे। हालांकि बाद में स्वामी ने कहा था कि वह जेटली के बारे में बात नहीं कर रहे थे। जेटली पर सीधा हमला कर फंसे सुब्रह्मण्यम स्वामी को प्रधानमंत्री ने नाम लिए बिना चेतावनी दी है। मोदी ने कहा कि फेमस होने के लिए बयान देना गलत है।    भाजपा ने दी चुप रहने की सलाह   दूसरी ओर, खबर है कि भाजपा ने सुब्रह्मण्यम स्वामी को चुप रहने की सलाह दी है। सूत्र बताते हैं कि स्वामी को व्यक्तिगत रूप से नसीहत दी गई है कि वह चुप रहें। पिछले दिनों बयानबाजी के बाद भाजपा के भीतरखाने विरोध के बाद स्वामी ने ट्वीट किया था कि अगर वह अनुशासित नहीं रहें तो खून-खराबा हो जाएगा। सुब्रह्मण्यम स्वामी पर भाजपा भी अब सख्त हो गई है। पार्टी ने उन्हें टाइट करने के लिए उन दो कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है, जहां स्वामी का भाषण होना था।  साभार-khaskhabar.com  

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पेइचिंग । एनएसजी में भारत की एंट्री में रोड़ा बनने पर देश के भीतर हुई तीखी प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कि अब हम चीन जैसे देश से भी आंखें मिलाकर बात करते हैं, पर चीन के सरकारी मीडिया ने परोक्ष रूप से भारत को चेतावनी दी है। चीन के आधिकारिक मीडिया ने कहा है कि भारत को यह समझ लेना चाहिए कि अमेरिका का समर्थन हासिल कर लेना पूरी दुनिया का समर्थन हासिल करना नहीं होता।   हालांकि चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इस मामले में भारत सरकार के सभ्य व्यवहार से संतुष्टि जतायी है लेकिन इंडियन मीडिया और भारत के नागरिकों को आड़े हाथों लिया है। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) ने पिछले हफ्ते दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में समग्र बैठक की थी। इसी हफ्ते गुरुवार शाम को एनएसजी के सभी सदस्यों ने स्पेशल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। इस कॉफ्रेंस में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों को एनएसजी में शामिल करने पर बात हुई थी। चीन का कहना है कि कम से कम 10 देशों ने नॉन एनपीटी देशों को एनएसजी की सदस्यता देने का विरोध किया था। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है लेकिन वह एनएसजी जॉइन करने को लेकर सबसे ज्यादा सक्रिय था। सोल में मीटिंग शुरू होने से पहले भारतीय मीडिया में इसे लेकर काफी गहमागहमी रही। कुछ मीडिया घरानों ने दावा किया कि 48 सदस्यों वाले एनएसजी देशों में से 47 ने भारत की सदस्यता का समर्थन किया है जबकि केवल चीन विरोध कर रहा है। अखबार ने लिखा है, ‘1975 में एनएसजी के गठन के बाद से ही स्पष्ट है कि सभी सदस्यों का एनपीटी पर हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। यह संगठन का प्राथमिक सिद्धांत है। अभी भारत पहला देश है जो बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर किए एनएसजी सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है। यह चीन और अन्य एनएसजी सदस्यों के लिए सिद्धांत की सुरक्षा में भारत की सदस्यता का विरोध करना नैतिक रूप से प्रासंगिक है।’ चीन के आधिकारिक मीडिया ने लिखा है, हालांकि इस मामले में भारतीय लोगों की प्रतिक्रिया काफी तीखी रही। भारत के कुछ मीडिया घरानों ने चीन को गाली देना शुरू कर दिया। कुछ भारतीयों ने चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार की बात कही। इसके साथ ही ब्रिक्स समूह से भारत के हटने की मांग भी की गई। भारत को एनएसजी में बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर किए शामिल होने की शक्ति अमेरिकी समर्थन से मिली। दरअसल वॉशिंगटन और भारत के रिश्तों में चीन को रोकना निहित है। अमेरिका का भारत के साथ बढ़ती करीबी का मुख्य उद्देश्य को चीन का सामना करना है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ‘अमेरिकी ही पूरी दुनिया नहीं है। अमेरिकी समर्थन का मतलब यह नहीं हुआ कि भारत ने पूरी दुनिया का समर्थन हासिल कर लिया। यह बुनियादी तथ्य है, भले इसकी भारत ने पूरी तरह से उपेक्षा की। भारतीयों का चीन पर आरोप का कोई मतलब नहीं है। चीनी कदम अंतरराष्ट्रीय मापदंडों पर आधारित है लेकिन भारत की प्रतिक्रिया उसके राष्ट्रीय हित से जुड़ी है। हाल के वर्षों में साफ दिखा है कि पश्चिम की दुनिया ने भारत को खूब शाबाशी दी है और चीन का विरोध किया है। भारत इनका दुलारा बन गया है। हालांकि दक्षिण एशियाई देशों की जीडीपी चीन का महज 20 फीसदी है। पश्चिमी देशों की आंखों में चीन चुभता है। भारत की अंतरराष्ट्रीय चापलूसी इनके लिए सुखद है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ‘मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रेजीम (एमटीपीसी) में भारत को नया सदस्य बनाया गया है। चीन को इसमें जगह नहीं दी गई है। इस खबर को लेकर चीनी नागरिकों में लहर नहीं फैली। अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में धक्कों से निपटने में चीनी नागरिक ज्यादा परिपक्व हैं। कई भारतीय आत्म केन्द्रित और आत्मतुष्ट हैं। दिलचस्प यह है कि भारत की सरकार ने इस मामले में सभ्य तरीके से बातचीत की। जाहिर है नई दिल्ली के लिए झल्लाना कोई विकल्प नहीं हो सकता। भारत के राष्ट्रवादियों को व्यहार सिखाना चाहिए। ये देश को बड़ी शक्ति बनाना चाहते हैं लेकिन इन्हें महाशक्तियों के खेल की समझ नहीं   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । टीम इंडिया का कोच ना बन पाने का रवि शास्त्री को काफी मलाल है। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि आखिर उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि सौरव गांगुली ऐसा कैसे कर सकते है। आखिर गांगुली को मुझसे क्या नफरत है। एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में रवि शास्त्री ने यह बात कहीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अनिल कुंबले 21 लोगों की शॉटलिस्ट में नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें टीम इंडिया का कोच बनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए सौरव गांगुली ने कमेटी के सदस्यों से सिफारिश की थी। वैसे रवि शास्त्री का नाम टीम इंडिया के कोच के लिए आगे चल रहा है। ऐसे में कुंबले को कोच बनाए जाने से रवि शास्त्री काफी निराश हो गए थे। रवि शास्त्री ने कहा कि टीम इंडिया का कोच ना बन पाने की निराशा सिर्फ एक दिन की थी और अब वह खत्म हो चुकी है। पिछले हफ्ते यह हुआ और अब मैं आगे बढ़ चुका हूं।   विदेश से छुट्टी मनाकर लौटे शास्त्री ने एक अंग्रेजी अखबार से चर्चा में ये बातें कहीं  1.क्या आपको लगता है कि बोर्ड आपको एक्सटेंशन नहीं देना चाहता था और इसलिए नए कोच के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई ? -ये बीसीसीआई का मसला है, मेरा नहीं।   2. क्या आप मानते हैं कि अनिल कुंबले का कोच बनाने का फैसला पहले से नियोजित था ? -फिर, मैं इसका जवाब देने वाला कौन होता हूं, मेरा काम टीम को तैयार करना था। मैं यह अपनी पूरी क्षमताओं के साथ करने में समर्थ था। मौजूदा समय में भारत सभी फॉर्मेट में दुनिया की टॉप दो टीमों में है।   3.क्या इंटरव्यू की प्रक्रिया पारदर्शी थी ? -मेरा काम सिर्फ इंटरव्यू देने तक था। अंदर क्या हुआ यह मैं नहीं जान सकता।    4.बतौर टीम डायरेक्टर अपने कार्यकाल को कैसे देखते हैं ? -टीम इंडिया के साथ 18 महीनों का साथ शानदार था। अगले तीन सालों में हम और बहुत कुछ हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। मुझे खुशी है कि मेरे कार्यकाल के दौरान प्रतिभाशाली टीम ने कई शानदार उपलब्धि हासिल की। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में वनडे और टी20 में शानदार प्रदर्शन हो या टेस्ट की नंबर वन टीम बनना, हमने शानदार खेल दिखाया। अब हमें अपनी बोलिंग पर थोड़ी मेहनत करनी होगी और मुझे यकीन है कि कुंबले के साथ अगले कुछ दिनों में इसमें सुधार आएगा।   5. क्यों, आपके इंटरव्यू के दौरान सौरव गांगुली उठकर बाहर चले गए? आप दोनों के बीच क्या मामला है ? -मैं केवल यह कहना चाहूंगा कि जब मेरा इंटरव्यू हो रहा था तो गांगुली वहां नहीं थे। बजाय मेरे, आपको गांगुली से ही पूछना चाहिए कि उन्हें मुझसे क्या परेशानी है।   6. छोटे फॉर्मेट में धोनी की कप्तानी के बारे में क्या सोचते हैं ? -धोनी मौजूदा समय के महान क्रिकेटरों में से एक हैं। जिस तरह से वह रन बना रहे हैं, वह अभी भी टीम में बेस्ट हैं। मैं सोचता हूं कि अभी उनमें तीन से चार सालों का क्रिकेट बचा है। मैचों के अंतराल और फॉर्मेट के हिसाब से देखें तो हम विराट कोहली को सभी फॉर्मेट के कप्तान के तौर पर देख सकते हैं। धोनी को सचिन और द्रविड़ की तरह रिलेक्स तरीके से खेलना चाहिए, ताकि उनका कप्तानी का भार खत्म हो जाए।   7.वेस्ट इंडीज आप बतौर कॉमेंटेटर जा रहे हैं ? -कॉमेंटेटर के तौर पर नहीं। जुलाई के आखिर में मैं वहां जाऊंगा गैरी सोबर्स का 80वां जन्मदिन मनाने।   साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई । देश के शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मंगलवार को मजबूती का रुख देखने को मिल रहा है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.46 बजे 74.53 अंकों की मजबूती के साथ 26,477.49 पर जबकि निफ्टी भी लगभग इसी समय 27.40 की बढ़त के साथ 8,122.10 पर कारोबार करते देखे गए।   बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 7.7 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 26,410.66 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 1.35 अंकों की मामली बढ़त के साथ 8,096.05 पर खुला।   साभार-khaskhabar.com  

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बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन को गृह सज्जा ब्रांड ‘ओएसिस टाइल्स’ के विज्ञापन के लिए चुना गया है। उन्हें उम्मीद है कि वह ब्रांड के लिए सौभाग्यशाली साबित होंगी। ‘हीरोपंती’ और ‘दिलवाले’ में अपनी भूमिकाओं के लिए मशहूर कृति प्रिंट विज्ञापनों और टीवी विज्ञापनों दोनों माध्यमों से ब्रांड का प्रचार करेंगी। ब्रांड के साथ अपनी सहभागिता के बारे में कृति ने एक बयान में कहा, ‘‘मैं इस बात से प्रभावित हूं कि यह ब्रांड बेहद नया है, लेकिन फिर भी यह तेजी से बढ़ रहा है। मुझे ब्रांड का संग्रह बेहद पसंद है।’’ कृति ने कहा, ‘‘इसका रंग संयोजन बेहद ताजगीभरा है। यह भारत के सर्वश्रेष्ठ नए ब्रांडों में से एक है। मुझे उम्मीद है कि मैं ब्रांड के लिए सौभाग्यशाली साबित होऊंगी। मुझे इस सहभागिता पर खुशी है।’’ ब्रांड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुखदेव पटेल ने कहा, ‘‘कृति एक प्रतिभाशाली युवा अभिनेत्री हैं। ब्रांड की तरह ही कृति भी स्टाइलिश और ऊर्जावान हैं। ओएसिस और कृति दोनों तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और हम साथ मिलकर नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।’’    साभार-khaskhabar.com  

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