मथुरा

मुंबई । रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) की हाई-स्पीड डाटा सेवा के ग्राहकों को अगले सप्ताह से रिलायंस जियो इनफोकॉम के 4जी नेटवर्क पर सेवाल मिलेगी। दूरसंचार विभाग को बुधवार को लिखे गए एक पत्र में कंपनी ने कहा कि शुरू में नेटवर्क स्थानांतरण मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे 12 प्रमुख सर्किलों में होगा। सूत्रों के मुताबिक, प्रथम चरण के सात अन्य सर्किलों में हैं महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश पूर्व, उत्तर प्रदेश (पश्चिम), ओडिशा, मध्य प्रदेश और बिहार। आरकॉम के ग्राहक मध्य जुलाई से छह और सर्किलों में 4जी एलटीई नेटवर्क पर सेवा हासिल करेंगे। सरकार को पहले लिखे गए एक अन्य पत्र में कंपनी ने कहा था कि मई 2016 से वह अपने सीडीएमए ग्राहकों को 4जी एलटीई नेटवर्क पर स्थानांतरित करना शुरू करेगी। कंपनी जियो के साथ हुए साझेदारी समझौते के तहत उदारीकृत किए गए 800 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम का उपयोग कर नेटवर्क को 4जी में स्थानांतरित करेगी। जनवरी में दोनों अंबानी बंधुओं -मुकेश और अनिल- आरकॉम और जियो ने पूरे देश में 800 मेगाहट्र्ज बैंड में रेडियो फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम के व्यापार और साझेदारी के लिए समझौता करने की घोषणा की थी। कंपनी ने पहले ही 6,600 करोड रुपये से अधिक का भुगतान कर 20 सर्किलों में अपने 850 मेगाहट्र्ज बैंड स्पेक्ट्रम का उदारीकरण कर लिया है। कंपनी 10 जीबी तक 4जी डेटा 93 रुपये की शुरुआती कीमत से देगी। फिलहाल यह 4जी डेटा मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब. यूपी, ओडिशा, मध्य प्रदेश और बिहार सर्कल में मिलेगा।   साभार-khaskhabar.com  

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बॉलीवुड ‘देसी गर्ल’ प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि वह मेड्रिड में चल रहे 17वें इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी (आईफा) पुरस्कार समारोह में गुनगुनाने से पहले नर्वस हैं। अंतर्राष्ट्रीय-जगत में कदम रख चुकीं प्रियंका ने ट्विटर पर प्रशंसकों से अपने कार्यक्रम के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, ‘‘आईआईएफए 2016 के लिए क्रेजी तैयारी और पहली बार इसमें गाने को लेकर नर्वस हूं।’’ चार दिवसीय आईफा फिल्म समारोह रविवार को पुरस्कार समारोह के साथ समाप्त होगा। अभिनेत्री ने स्पेन में अपने प्रशंसकों से भी मुलाकात की।  टीवी श्रृंखला ‘क्वांटिको’ के बाद उन्होंने हॉलीवुड फिल्म ‘बेवॉच’ में काम किया। वह इस साल ऑस्कर कार्यक्रम में भी नजर आईं थी।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । टीम इंडिया के कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी को खेल क्रिकेट ही नहीं, कुछ और खूबियों के कारण जाना जाता है। हेयर स्लाइल, बाइक के शौक के कारण भी जाना जाता है। लेकिन, हम बात कर रहे है उनके नेचर की। दरअसल, एक पाकिस्तानी मॉडल और स्पोर्ट्स प्रेजेंटर मथिरा मोहम्मद धोनी की ऐसी ही दरियादिली की कायल है। धोनी की विनम्रता का जिक्र मथिरा ने एक इंटरव्यू के दौरान किया। उन्होंने एक इंसीडेंट को याद करते हुए बताया कि किस तरह एक बार उनके ही खिलाडिय़ों ने उन्हें फटकार लगा दी थी, जबकि धोनी ने खुश कर दिया था। मथिरा के अनुसार, ‘ये बात तब कि है जब एक बार भारतीय टीम पाकिस्तान टूर पर आई थी। तब मैं 15 साल की थी।’ ‘एक शाम मैं जिस होटल में डिनर कर रही थी उसी होटल में दोनों टीमों के खिलाड़ी भी पहुंचे थे। मैं वहां अपने स्टार क्रिकेटर्स को देखकर खुद को रोक नहीं सकी और ऑटोग्राफ लेने पहुंच गई। कई पाकिस्तानी क्रिकेटर्स ने मुझे ऑटोग्राफ तो दिए, लेकिन साथ ही मुझ पर भडक़ भी गए। उन्होंने मुझे फटकारते हुए कहा कि इस लडक़ी में जरा भी तमीज नहीं। कम से कम खाने के वक्त तो डिस्टर्ब न करे। मथिरा के अनुसार उस वक्त मैं बहुत अपमानित महसूस कर रही थी। मैं जोर से रोना चाहती थी कि तभी एक इंडियन क्रिकेटर ने पुकारा। उन्होंने बुलाकर कहा, हम भी क्रिकेटर हैं। यहां आकर अपनी कैप पर ऑटोग्राफ लो। मुझसे ये कहने वाले कोई और नहीं बल्कि इंडियन क्रिकेटर एमएस धोनी थे। धोनी ने ना सिर्फ मुझे ऑटोग्राफ दिया, बल्कि कुछ देर बैठकर रिलैक्स होने के लिए भी कहा। आपको बता दें कि स्पोर्ट्स प्रेजेंटर मथिरा अक्सर अपने शो और चैट में धोनी की तारीफ करती रहती हैं। वो कई बार धोनी के खेल की तकनीक और उनके नेचर की पैरवी करने को लेकर पाकिस्तान में सुर्खियों में रहती हैं।    साभार-khaskhabar.com  

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वॉशिंगटन । एनएसजी में एंट्री न कर पाने से निराश भारत को अमेरिका ने दिलासा दी है कि उसके लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का पूर्ण सदस्य बनने का ‘आगे का एक रास्ता’ साल के अंत तक है। अमेरिका ने यह बात सोल में एनएसजी की एक पूर्ण बैठक समाप्त होने के कुछ घंटे बाद कही, जिसमें चीन नीत विरोध के मद्देनजर भारत की सदस्यता के बारे में कोई निर्णय नहीं हो सका। ओबामा प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि हमारे समक्ष इस साल के अंत तक आगे का एक रास्ता है। अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि इसके लिए कुछ काम करने की जरूरत है। हमें इस बात का भरोसा है कि साल के अंत तक भारत (एनएसजी) व्यवस्था का एक पूर्ण सदस्य होगा। अधिकारी ने 48 सदस्यीय समूह के भीतर भारत की सदस्यता को लेकर हुई चर्चाओं और विरोध की जानकारी का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि आंतरिक चर्चाओं की जानकारी गोपनीय है। अधिकारी ने कहा कि यद्यपि अमेरिका का भारत की एनएसजी की सदस्यता को लेकर दृढ़ विश्वास है तथा ओबामा प्रशासन ने इस मुद्दे पर भारत एवं अन्य देशों के साथ नजदीकी तौर पर काम किया है। अधिकारी ने चर्चाओं की जानकारी दिए बिना प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) में हुई इसी तरह की चर्चा का उल्लेख किया जिसमें भारत को उसके सदस्य देशों के बीच कई महीने की चर्चा के बाद इस महीने के शुरू में शामिल किया गया था। एनएसजी की तरह ही एमटीसीआर में भी निर्णय सहमति से किए जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि हमें उस भूमिका पर एक निर्णय की उम्मीद थी जो भारत निभाएगा। अधिकारी ने जोर देकर कहा कि हम इस सप्ताह चर्चा समाप्त कर पाए और हमारे सामने भारत के एक पूर्ण सदस्य बनने के लिए वर्ष के अंत तक एक आगे का रास्ता है। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका उम्मीद करता है कि भारत को एनएसजी की सदस्यता इस वर्ष के अंत तक हासिल हो सकेगी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने दोहराया कि यह हमारी उम्मीद है। हमारी उम्मीद है कि यह इस वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा। एनएसजी की पूर्ण बैठक सोल में समाप्त हुई जिसमें भारत की सदस्यता के बारे में कोई निर्णय नहीं किया गया। चीन ने भारत की एनएसजी की सदस्यता के दावेदारी के अपने विरोध को गोपनीय नहीं रखा। यद्यपि उसने भारत के पास पर्याप्त बहुमत होने के बावजूद उसकी सदस्यता की दावेदारी को रोक दिया। भारतीय अधिकारियों के अनुसार 38 देशों ने भारत का समर्थन किया।   साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली । बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी एक प्रोफेसर को आरबीआई गवर्नर बनाना चाहते है। शायद यही वजह है कि वे मोदी सरकार के मंत्रियों पर ही निशाना साधने में लगे हुए है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो स्वामी इसलिए ही ऐसा कर रहे है। आपको बता दें स्वामी ने आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन, चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमणियन, इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी शक्तिकांत दास को निशाना साधा है। इतना ही नहीं, स्वामी वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी कमेंट करने से नहीं चूके। स्वामी ने पहले रघुराम राजन के खिलाफ जुबानी हमले किए। वे राजन के सेकंड टर्म के फेवर में नहीं थे। जब खुद राजन ने सेकंड टर्म लेने से इनकार कर दिया था, तो स्वामी अब उन लोगों को निशाना बनाने लगे जिनके गवर्नर बनने की संभावना दिख रही है। राजन के बाद अरविंद सुब्रमणियन या शक्तिकांत दास को गवर्नर बनाए जाने की खबरें आ रही हैं। हालांकि, सरकार ने इस पर कुछ साफ नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्वामी चाहते हैं कि प्रोफेसर वैद्यनाथन आरबीआई गवर्नर बनें। पिछले साल उन्होंने एक ट्वीट के जरिए भी वैद्यनाथन को आरबीआई गवर्नर बनाने की सिफारिश की थी।   कौन हैं वैद्यनाथन प्रोफेसर वैद्यनाथन आईआईएम बेंगलुरू में फाइनेंस डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं। उन्हें स्वामी का काफी करीबी माना जाता है। 2009 में यह रिपोर्ट भी आई थीं कि लालकृष्ण आडवाणी ने ब्लैक मनी का जो मुद्दा उठाया था, तब उसके पीछे वैद्यनाथन का अहम रोल था। वैद्यनाथन ब्लैक मनी पर बीजेपी की ओर से बनाई गई टास्क फोर्स के मेंबर भी थे। वैद्यनाथन अध्यापन के अलावा परामर्श भी देते हैं। उन्होंने वित्त मंत्रालय, वर्ल्ड बैंक, गोल्डमैन शैक्स और कई बड़े बैंकों के परामर्शदाता के तौर पर काम किया है। इसके अलावा वे सेबी, आरबीआई और वित्त मंत्रालय की कुछ समितियों के भी सदस्य हैं। वे काले धन पर एक किताब भी लिख रहे हैं।     साभार-khaskhabar.com    

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कोलकाता । पूर्व कप्तान अनिल कुंबले को टीम इंडिया का कोच बनाए जाने के बाद रवि शास्त्री ने काफी नाराजगी जाहिर की है। शास्त्री ने मीडिया से कहा-मैंने टीम डायरेक्टर के रूप में 18 महीने काफी मेहनत की थी, फिर भी मुझे हेड कोच के रूप में नहीं चुना गया। मुझे जब यह खबर मिली तो मैं काफी निराश हुआ। मैं निराश हूं, लेकिन मेरी अनिल कुंबले को शुभकामनाएं हैं। मैं अब कमेंटरी की दुनिया में लौटने का विचार कर रहा हूं। मेरा इंटरव्यू शाम को 5 से 6 बजे के बीच हुआ था। इंटरव्यू के दौरान सचिन, वीवीएस लक्ष्मण और संजय जगदाले थे। गांगुली नहीं थे। मेरी मीटिंग काफी अच्छी रही। वे टीम को लेकर मेरे प्लॉनिंग के बारे में जानना चाहते थे। मैंने हर सवाल का जवाब दिया। इंटरव्यू के समय वीवीएस लक्ष्मण और संजय ताज बंगाल होटल में थे। सचिन स्काइप के जरिए लंदन से जुड़े और मैं भी शास्त्री बैंकॉक में था। वीडियो लिंक के जरिए इंटरव्यू दिया, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। साथ ही उन्होंने कहा कि सौरव गांगुली के कारण मैं कोच पद पाने में नाकाम रहा।    सौरव गांगुली काफी पावरफुल  बीसीसीआई में सौरव गांगुली पावरफुल होते जा रहे हैं। वे अनिल कुंबले को टीम इंडिया का हेड कोच बनाने के लिए सचिन तेंडुलकर और वीवीएस लक्ष्मण को मनाने में कामयाब रहे। सौरव की वजह से ही शरद पवार लॉबी भी चुप्पी साधे रही। कुंबले शॉर्टलिस्ट किए गए 21 लोगों में शामिल नहीं थे। उसके बाद भी गांगुली के दबाव में उन्हें चुना गया।    क्यों गांगुली ने नहीं किया शास्त्री का फेवर सौरव गांगुली और रवि शास्त्री के रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे। बताया जाता है कि सौरव कतई नहीं चाहते थे कि शास्त्री कोच बने। एक साल पहले गांगुली टीम डायरेक्टर की दौड़ में रवि शास्त्री से पिछड़ गए थे। इसके बाद गांगुली ने पूरी कोशिश की कि शास्त्री को दूसरा मौका न मिले। जब गांगुली की जगह पर शास्त्री को टीम का कोच बनाया गया, तब यह खाई और चौड़ी हो गई।    21 में भी नहीं शामिल थे कुंबले  कुंबले जरूरी शर्तों (जिनमें से एक, किसी राज्य या देश की टीम की कोचिंग का अनुभव) को पूरा नहीं करते थे। इसलिए उन्हें 21 लोगों की शॉर्टलिस्ट में शामिल नहीं किया गया था। लेकिन गांगुली के दबाव में ही उन्हें इस लिस्ट में जगह मिली। सलेक्शन के बाद कुंबले ने बताया- इस पोस्ट के लिए इंटरव्यू देना काफी मुश्किल था। मैं तनाव में था। टीम के ड्रेसिंग रूम में कोच के तौर पर वापसी करना शानदार है। मैं इस चुनौती और बड़ी जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह तैयार हूं। मैं जानता हूं काफी सारी उम्मीदें मुझसे जुड़ी हुई हैं, मैं इसके लिए तैयार हूं।     साभार-khaskhabar.com    

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