नई दिल्ली । दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में चल रही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की बैठक में भारत की कोशिशों को एक और झटका लगा जब स्विट्जरलैंड ने भी 48 देशों के इस समूह में भारत को शामिल करने का विरोध किया। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, स्विट्जरलैंड अपने पहले के रुख से पलट गया है। इस महीने की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान स्विट्जरलैंड ने एनएसजी में भारत की सदस्यता को समर्थन देने की घोषणा की थी। इससे पहले दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में एनएसजी सदस्यों की अहम बैठक के दौरान कुछ देशों ने भारत द्वारा एनपीटी (परमाणु अप्रसार संधि) पर हस्ताक्षर नहीं करने के मुद्दे पर अपना विरोध जताया था। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्राजील, ऑस्ट्रिया, न्यू जीलैंड, आयरलैंड और तुर्की ने भारत की सदस्यता का विरोध किया। इन देशों ने दलील दी कि चूंकि भारत ने एनपीटी पर दस्तखत नहीं किया है, इसलिए उसे इस क्लब में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इन देशों के विरोध के बाद यह साफ हो गया कि सिर्फ चीन ही नहीं है जो इस मुद्दे पर भारत का विरोध कर रहा है। इसके पहले ताशकंद में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग से विशेष मुलाकात कर समर्थन मांगा था। मोदी ने जिनफिंग से कहा कि भारत के आवेदन पर चीन निष्पक्ष रवैया अपनाकर समर्थन करें। अब शुक्रवार को फिर बैठक हो रही है, जिसमें समर्थन पर फिर से चर्चा होने की संभावना है। बता दें कि एनएसजी सर्व सहमति से किसी को मेंबर बनाता है। इसका मतलब यह है कि एक भी सदस्य देश अगर भारत की सदस्यता का विरोध करता है तो यह कोशिश बेकार हो जाएगी। पिछले कुछ वर्षों से भारत एनएसजी का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए 12 मई को औपचारिक आवेदन किया गया था। एनएसजी न्यूक्लियर सेक्टर से जुड़े बड़े मुद्दों की निगरानी करता है। इसके सदस्यों को न्यूक्लियर टेक्नॉलजी के ट्रेड और एक्सपोर्ट की इजाजत होती है। साभार-khaskhabar.com
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