नई दिल्ली । बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय से उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। डैमेज कंट्रोल के लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 25 जून को पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक लखनऊ में बुला ली है। इसमें विलय के सवाल पर अंतिम फैसला हो सकता है। इसके अलावा 27 जून को अखिलेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं।
इस बीच विलय को लेकर नाराज बताये जा रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिये। इसके बाद पार्टी के यूपी प्रभारी और वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उनके आवास गए। बताया जाता है कि मुख्यमंत्रीअखिलेश यादव ने उन्हें इस विलय पर अपने एतराज और पार्टी की छवि खराब होने की चिंता से अवगत कराया। एक घंटे की मुलाकात के बाद शिवपाल सिंह यादव मीडिया से बिना बात किये वहां से निकल गए।
दूसरी ओर माध्यमिक शिक्षा मंत्री के पद से मंगलवार को बर्खास्त किये गए बलराम यादव ने मीडिया से कहा कि मुझे इससे कोई तकलीफ नहीं है और ना ही मैं इससे आहत हूं। मैं सपा की स्थापना से ही साथ हूं। सपा मेरी जिंदगी है और नेता जी (मुलायम सिंह यादव) मेरे पिता के समान हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पाटी ने जो भी काम दिया है, उसे मैंने सही तरीके से करने की कोशिश की है।
सूत्रों की मानें तो मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता के विलय को लेकर अखिलेश और चाचा शिवपाल यादव के बीच भारी मतभेद हैं। लेकिन सीएम कैंप की तरफ से कुछ खुलकर नहीं कहा जा रहा है। दूसरी तरफ ताकतवर मंत्री बलराम यादव अपनी कैबिनेट से बर्खास्तगी से काफी दुखी नजर आए। वह बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए रो पड़े। उन्होंने रोते हुए कहा, मेरी जिंदगी है समाजवादी पार्टी। नेताजी (मुलायम सिंह यादव) मेरे आदर्श ही नहीं, बल्कि पिता हैं।
माना जा रहा है कि बलराम यादव की मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय कराने में अहम भूमिका थी। इसी वजह से उन्हें अखिलेश की नाराजगी झेलनी पड़ी है। मीडिया से बातचीत के दौरान बलराम यादव ने भावुक होकर कहा, समाजवादी पार्टी, नेताजी और मेरे रिश्ते अपपरिवर्तनीय हैं। मैंने कल नेताजी से बात भी की, हमारे रिश्तों में कोई बदलाव नहीं आएगा।
वहीं सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी और कौमी एकता विलय के एक ही दिन बाद आज अलग हो सकते हैं। कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव इसके मद्देनजर बातचीत करने अखिलेश यादव के आवास पर भी पहुंचे।
कौमी एकता दल राज्य के पूर्वांचल में खासा दबदबा रखने वाली पार्टी है। माफिया सरगना मुख्तार अंसारी मऊ से विधायक हैं। वह हत्या समेत कई आरोपों में पिछले कई साल से जेल में हैं। कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय के बाद विपक्षी दलों को घेराबंदी करने का नया मौका मिल गया है। यही वजह है कि जल्द ही दोनों के अलग होने का ऐलान हो सकता है।
वहीं अखिलेश के करीबी सूत्रों के मुताबिक, माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव की छुट्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय को लेकर नहीं हुई। सीएम उनके कामकाज से खुश नहीं थे। इस संबंध में फैसला दो हफ्ते पहले ले लिया गया था।
उधर, शिवपाल यादव ने कहा कि कौमी एकता दल मुख्तार अंसारी की पार्टी नहीं है। मुख्तार सपा में नहीं आए हैं। बलराम यादव को पार्टी में दरकिनार नहीं किया गया है। हमारी पार्टी में सब कुछ बढिय़ा चल रहा है। पार्टी में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। नेताजी का फैसला हर किसी को स्वीकार्य है।
साभार-khaskhabar.com
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